अरमां यार की जवानी की रवानी है
बन्दगी इश्क आशिकी जिंदगानी है।।
गम आंसुओ के लम्हें जिंदगी मायने मर कर भी जिंदा रहना है ।।

जिंदगी के चार दिन आंसू गम से गमगीन  खुशियों के मयस्सर कम दिन लम्हो की खुशियों की जिंदगानी है।
बन्दगी इश्क आशिकी जिंदगानी हैं।।
कली अपनी नियत की भौरों की हस्ती मस्ती एक दूजे की चाहत दीवाना दीवानी है।
कली से फूल भौरों की कहानी
बन्दगी इश्क आशिकी जिंदगानी।।

पानी की फितरत बरसाना सुख जाना आंसू भी नज़रों का पानी खुशी गम में बरसते लम्हो के लिये कभी तन्हाई की जुबानी कभी जिंदगी की कहानी है।।

वक्त ठहरता नही गुजरा लौट कर आता ही नही प्यार वक्त का शौक तन्हा दिल का दीदार यार दिल आईंना
टूट जाने का दर्द भी बन्दगी इश्क आशिक़ जिंदगानी है।।
साज का साथ भी धोखा जुबा चुप नज़रों के अल्फ़ाज़ हमराज के नाज हद से गुजर जाना।।

जिक्र ही नही जिस बात का गुनगुना जवानी की रवानी है बन्दगी इश्क आशिकी जिंदगानी।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर
 गोरखपुर उत्तर प्रदेश