पानी का खजाना
यूँ ही ना लुटाना
वरना आने वाले कल में
पड़ जायेगा पछताना
जल है तो ही कल है
वरना सूनी सृष्टि सकल है
जल बिन व्यर्थ है जीवन
जीवन का आधार ही जल है
एक बूँद भी व्यर्थ न बहने पाए
अनमोल है इस बात को समझों तुम
आने वाले कल में सूनी हो रही नदियाँ
नदियों का अस्तित्व भी कहाँ बिन जल है......

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