छवि मनोहारी चंचल चितवन
प्रात उठ करते हम जिनका वंदन
हैं जो कैलाशपति त्रिकालदर्शी
तीनों लोकों के स्वामी त्रिपुरारी
तप अनंत शैल सुता ने किया वरण
मनमुग्ध है देख शिवशक्ति का ये स्वरुप
प्रथम पुत्र मात पिता के आज्ञाकारी
कार्तिकेय सम पुत्र है जो स्वाभिमानी
लाडले ने किया परिक्रमा माता पिता की
मिला आशीर्वाद बने गणेश प्रथम वंदनीय
सर्पों की माला, लगा भभूत,चमके मुखमंडल
परिवार ऐसा नतमस्तक हो प्रणाम करे जगतमंडल
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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