गतांक से आगे
  
मनीष के वापस आने पर अचानक मौसम का बिगड़ना ,ऊंची ऊंची लहरों का उठना कोई इतफाक नहीं था ।यह मनीष और जूली की जिंदगी में आने वाले भयंकर तूफान की चेतावनी थी।

लेकिन मनीष कुछ समझ भी नहीं पाया।वो तो मिलन की खुशी में तूफान को ही भूल चुका था,उसे सिर्फ और सिर्फ जूली का मुस्कुराता चेहरा ही दिख रहा था।

घर पहुंच उसने दस्तक दी। जूली के लिए उसका आना सुखद आश्चर्य था ,क्योंकि उसने उसे पहले से नही बताया था।

ओ मनीष ,तुम आ गए।तुमने बताया भी नहीं ,जाओ नहीं बोलती मैं तुमसे गुस्सा हूं_जूली ने रूठने का नाटक करते हुए कहा।

अरे मेरी जान_रूठ कर जान लोगी क्या? इतने दिन दूर रहकर ,मैं कैसे जी पाया हूं ,तुम सोच भी नही सकोगी।

जूली ने कहा _क्या मेरी हालत तुमसे बेहतर थी??मैं तो यहां अकेली ,सिर्फ दिन ही गिन  सकती थी। तुम तो सबके साथ थे,लोगों के बीच हंस बोल लेते होगे ।मैं ..... बताओ ?मैंने कैसे अपने दिन काटे ।

अच्छा बाबा ,🙏, चलूं फ्रेश हो लूं  तबतक ,तुम मेरे लिए चाय बना दो।

ठीक है,जल्दी आना ।अब एक पल के लिए भी तुम मेरी आंखों से दूर न होना,समझे_जूली ने हल्की प्यार भरी झिड़की दी।
हां बाबा हां। 
जूली चाय बनाने चली गई।उधर मनीष ने जब अपना सूटकेस खोला तो कपड़े गीले थे ,और पानी  भरा था सूटकेस में।

मनीष ने पानी बाथरूम में जाकर फेंका।वहां अचानक लहर सी उठने लगी ,और एक पल के लिए मनीष की आंखों के सामने समुद्र की ऊंची उठती लहरों वाला मंजर छा गया।

फिर पल  में सब कुछ ठीक हो गया।उसे बाथरूम भी सूखा दिखने लगा।

मनीष ने अपना भ्रम और यात्रा की महीनों की थकान समझ ,ज्यादा गौर नहीं किया ।

फ्रेश होकर ,दोनों ने मिलकर चाय पी।ढेर सारी बातें यात्रा की मनीष ने जूली को बताई ।
जूली और मनीष एक पल के लिए भी एक दूसरे को आंखों  से दूर जाने नहीं दे रहे थे।

एक सप्ताह बीता ही था,मनीष  को जूली के स्वभाव में काफी परिवर्तन दिखने लगा। वह पहले शर्मीली थी ,लेकिन अब उसका प्यार जंगलियों की तरह होता था ,उन्मुक्त।
वह घंटों घंटों नहाती थी।

रात में भी वह बाथरूम में पानी में ही रहती ,और पानी एक दम नीला होता।

सब कुछ अजीब लग रहा था,लेकिन कुछ समझ में भी तो नहीं आ रहा था।
मनीष की नौकरानी जो उसके शिप में जाने के बाद से छुट्टी पर चली गई थी।
अचानक एक दिन ,जब मनीष अपने दोस्त से मिलने जा रहा था ,आ गई।
जूली मनीष को छोड़ने बाहर निकली थी।उसने दोनों को नमस्ते किया ,लेकिन जूली ने तुरंत उससे पूछा कौन हो तुम ?यहां क्या करने आई हो।
नौकरानी और मनीष अचंभित हो गए।मनीष ने कहा _अरे जूली क्या हुआ तुम्हें,ये तो अपनी सरिता है।जो छुट्टी लेकर गांव गई थी।

जूली ने कहा _हां , हां,सरिता ,बहुत दिनों बाद आई हो न।मुझे भी न आजकल मनीष के अलावा कुछ याद ही नहीं रहता।

मनीष कुछ बोला नहीं ,अपने दोस्त के घर चला गया।
सरिता को शक हो रहा था,वह काम तो कर रही थी ,लेकिन बार बार जूली का व्यवहार उसे खटक रहा था।

जूली सरिता को घूरते  हुए अपने बेडरूम में चली गई।
सरिता ने देखा एक्वेरियम में एक मछली तड़प रही थी ।शायद उसे खाना नहीं मिला था,उसने सोचा मेमसाहब तो अब कुछ भी ध्यान नहीं देती ।पहले तो कितना ख्याल रखती थीं हर चीज का ।मछलियों से तो बेहद प्यार था उनको।

खाने का पैकेट खोल कर उसने एक्वेरियम में डाल दिया।
उस मछली में उसे जैसे अपनी मेमसाहब का अक्स दिखा ।वह समझ नहीं पा रही थी ।
वह बेडरूम में झाड़ू लगाने गई,बेडरूम का दरवाजा धीरे से खोल वह  अंदर  गई।बेडरूम में मेमसाहब नहीं थी लेकिन बाथरूम का पानी बेडरूम में आ  रहा था।उसने सोचा कहीं मेमसाहब ने  बाथरूम का  नल  तो नहीं खोल दिया है ।

उसने  बाथरूम  का दरवाजा खोला ,तो देख कर उसके हाथ पांव फूल गए।उसकी आवाज नहीं निकल पा रही थी।
उसने देखा एक  जीव जो आधी स्त्री और आधी  मछली वाली  शरीर की थी ,अंदर थी।
वह कुछ समझ पाती उससे पहले उस जीव ने उसे अंदर खींच लिया और उसे मार डाला।

मनीष देर रात घर आया।रात  को जब वह सोया तो तो अचानक उसने स्वप्न देखा,कोई जलदैत्य उसके घर में आया है ,और जूली को साथ ले जा रहा, जूली उससे जान छुड़ाने में लगी थी।

अचानक इस स्वप्न को देख ,वो हड़बड़ा कर उठ गया,उसने जूली को सोते हुए  बिस्तर पर पाया ।

अगले दिन जब वह उठा,देर हो चुकी थी सर भारी था।उसने पूछा आज सरिता नहीं आई क्या??
जूली ने कहा _नहीं उसके पिता की मौत हो गई थी इसलिए वो जल्दी जल्दी अपने गांव चली गई। 

अच्छा ठीक है,तुमने उसे पैसे तो दे दिए,बहुत मेहनती और ईमानदार है वो _मनीष ने कहा।
जूली ने कहा _अरे हां ,और क्या ?मैने उसे पैसे दे दिए,और कहा की अच्छे से सारा क्रिया कर्म करके आना ।

ठीक किया ,तुम तो मेरी जानेमन हो,प्लीज मेरे लिए एक कप कॉफी बना दो।
ठीक_जूली बोली और कॉफी बनाने किचन में चली गई।

मनीष एक्वेरियम के पास चला गया।उसने देखा उसमें पानी भी कम था,और खाना भी नहीं था,एक मछली बहुत तड़प रही थी,और कुछ कहना चाह रही थी।

पास गया ,एक्वेरियम में पानी भरा ,पास से उस मछली में जूली  उसे भी  नजर आई ।वो कुछ समझ नहीं पा रहा था।


उसने जूली को  एक्वेरियम की सही से देखभाल न करने  के लिए डांटा।
जूली को पहली बार मनीष ने डांटा था,इसलिए उस रात जूली ने उससे बात नहीं की।
मनीष को भी ग्लानि हो रही थी,इसलिए उसे नींद नहीं आ रही थी।
अचानक करीब 2 बजे उसके कमरे में पूरा नीला पानी भर गया।एक जलदैत्य कमरे में घुस आया , वह उठने ही वाला था, तब तक उसने देखा कि पास लेटी जूली भी एक जलदैत्या के रूप में  बदल गई।

दोनों में लड़ाई होने लगी।वह दैत्य उसे वापस चलने को कह रहा था,लेकिन  वो दैत्या जाने को तैयार नहीं थी।

मनीष से अब लेटे रहा नहीं गया ,अब तक उसे माजरा समझ में नहीं आया था।वो उठ खड़ा हुआ।उसने जोर से पूछा कौन हो तुमलोग??

मेरी जूली कहां है?
दैत्य ने कहा ये जेनी है,मेरी पत्नी ,इसने तुम्हारी जूली को मछली बना एक्वेरियम में कैद कर रखा है।
जेनी_जूली की बहन,मनीष चकरा गया ।
तुम  जेनी की बहन कैसे हो सकती है?
उसने उस दैत्या  से पूछा।

अपना राज खुलते ,जेनी जोर जोर से चिल्लाने लगी। हां मैं ही हूं जेनी।शुरू से मुझे उलाहना मिलती ,मुझसे ज्यादा जूली को लोग प्यार करते। मैं लगातार  जलती रही ।जब से मनीष को देखा था , मैं मनीष  के साथ जीना चाहती थी,लेकिन इसे भी जूली ने मुझसे छीन लिया।

जूली की शादी के बाद मैं उदास थी ,और समुद्र के किनारे खड़ी लहरों को देखती,ईश्वर को कोस रही थी।अचानक ये समुद्री दैत्य लहरों के बीच से प्रगट हुआ ,और मुझे ले गया अपनी दुनिया में,उसने मुझे  ये रूप दिया।
वहां की रानी हूं मैं,लेकिन मुझे इससे प्यार नहीं है।में इससे नफरत करती हूं।
मैं जूली को मार डालूंगी ,और हमेशा हमेशा यहीं रहूंगी।


यह सुन मनीष पागल सा हो रहा था,उसने पूछा  _ओह हो,तुम कितनी खुदगर्ज और क्रूर हो,जेनी मैं तुम्हें जिंदा नहीं छोडूंगा।

मनीष तुम जाओ अपनी जूली को बचा लो,ये एक्वेरियम का पानी सोख रही है_ दैत्य चिल्लाया।

मनीष दौड़ा,एक्वेरियम का पानी सूख रहा था, जूली तड़प रही थी।जल्दी से एक जार में पानी डाल ,मनीष ने मछली को उसमे डाल दिया।तब तक दैत्य ने जेनी रूपी दैत्या को अपने कब्जे में कर लिया।

उसे अपने पाश में बांधा और अपनी शक्तियों का प्रयोग कर  बेहोश कर दिया।
जल्दी से वह  दैत्य मनीष के पास आया ,और जार लेकर उसने अपने हाथों को उपर की ओर हिलाया ,और मछली फिर से जूली बन गई।

उसने कहा ,अब मैं जल्दी जा रहा हूं ,नहीं तो उठने पर इसे काबू करना मुश्किल होगा।
मनीष और जूली ने उसका शुक्रिया कहा।आज उसकी ही वजह से मनीष को जूली वापस मिली थी।
              अब उनका सुखी दांपत्य जीवन था ।मनीष ने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ दी ।फिर वह कभी  भी समुद्र में नहीं गया।

                समाप्त