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हम औरतों के ह्रदय में,
इतनी आग होनी चाहिए ।
महिला हिंसा के विरुद्ध भी,
शाहीन बाग होना चाहिए ।
रक्त संग खोलती
ज्वाला बहे धमनियों में,
छूते ही दानवों का ,
सर्वनाश होना चाहिए ।
कब तक झुलसेगी बेटियां
तेजाब के छींटों से यहां ।
कब तक निर्भया तड़पकर
प्राण त्यागती रहेगी ।
कब तक गिरेगी बिजलियां
दामिनी के दामन पर ।
कब तक बेटियां दरिंदों से
डरकर भागती रहेगी ।
अब डगमगा उठे
सियासत की कुर्सियां
एक स्वर में बुलंद
आवाज होनी चाहिए ।
क्यों परोसा जाता है,
हमारे जिस्म को सामान सा ?
क्यों हमें भी जीने का
बराबर अधिकार मिलता नहीं ?
क्यों मसल दी जाती है कलियां
अपने ही घर के बाग में ?
क्यों जला दी जाती हैं
बहुएं चूल्हे की आग में ?
इन सवालों का सही
जवाब होना चाहिए ।
हम लड़ सके चुनौतियों से
अपने दम पर यहां
बेटियों में हौसला भरने का
रिवाज होना चाहिए ।
हम औरतों के ह्रदय में
इतनी आग होनी चाहिए ।
बलात्कार के विरुद्ध भी
शाहीन बाग होना चाहिए ।
.....✍️पिंकी मिश्रा
भागलपुर बिहार ।

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