पत्नी….
सुनो पति जी आज करा दो सागर की सैर।
देखूगी 😎 बहुत सारी छोटी -बड़ी मछलियां।
शायद देखने को मिल जाए द्वारका पूरी और टाइटेनिक जहाज।
असली में तो ना बैठ सके ।
लेकिन शायद दर्शन उसके हो जाए।
तृप्त होकर जीवन, हमारा सुधर जाए।
टाइटेनिक पोज में तो, हम भी फोटो खिचवाए।
पति….
चल तु भी क्या याद करेगी..
तुझे स्कूबा डाइव करा दूँ।
बन मछली, रंग बिरंगी मछलियों के बीच में घूमना।
हाँ खा जाएंगी व्हेल शार्क तुझको ।
फिर मुझसे ना कहना।
पत्नी….
तुम कि क्या किसी मगरमच्छ से कम हो।
जान मेरी खाने को रहते हमेशा तैयार।
लेकिन हाथ कभी न आती हूँ ।
क्योंकि कछुआ जैसी गति तुम्हारी।
मैं सेलफिश सबसे गति तेज।
पति….
मुझको नहीं उलझना तेरे कांटे में।
जैलीफिश जैसी तुम हो खतरनाक।
एक बार मे ही आदमी का हो जाए कामतमाम।
पत्नी….
मैं बैटफिश जैसे पहले ही खतरे को भाप लेती हूँ।
तुम्हारी झूठी बातों के कच्चे जाल में मैं न फसती हूँ।
पति…..
सही कहा तुम हो बैटफिश ,
पत्ते बन जैसी आँखो को धोखा देती हो।
फिर बड़ी चतुराई से फ्लाईंग फिश बन उड़ जाती हो।
पत्नी….
घर में ही समुद्र की सारी प्रजातियाँ है।
फिर क्यूँ जाना दूर कहीं ,
यही बैठे बैठे सास रोक डाल्फिन बनने का मजा लेते हैं।
पति….
चलो जान छुटी हमारी ,नहीं जाना पडेगा समुद्र में गोता लगाने।
पानी के नाम से ही हालत हमारी पतली हो जाती हैं। आ.. छि..आ..छि.. छिक शुरूहो जाती हैं।
भला इसी मे ओक्टोपस जैसे हाथ पैर न फैला। समुद्री घोड़े जैसे शान्त ,चुपचाप निकल जा।
नीलम गुप्ता (नजरिया)दिल्ली

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