अब हाथ में तेरे, मेरा जीवन,
है मनमोहन मेरे, मुरली वाले,
है मनमोहन.....
तेरा ही सहारा, मेरे जीवन को,
बीच भंवर में नैया मेरी,
है मनमोहन.....
इस भव सागर से पार लगाना,
न भाये अब दुनियादारी,
है मनमोहन.....
माया मोह, खींच रहा मुझको,
टेर मैंने लगायी तुझको,
है मनमोहन.....
न है कोई अपना, इस जहाँ में,
सब अर्थ की मोह माया,
है मनमोहन.....
अब न देर लगाना, मनमोहना,
टेर लगा लगा अब हारी,
है मनमोहन.....
जीवन नैया डगमग, डोल रही,
आओगे कब खैवनहारे,
है मनमोहन.....
अब हाथ में तेरे,मेरा जीवन,
है मनमोहन मेरे, मुरली वाले,
है मनमोहन.....
काव्य रचना-रजनी कटारे
जबलपुर (म.प्र.)

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