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मेरी जिंदगी है क्या ,
एक खुली किताब है ।
तपिश देता चांद है कभी,
कभी सुकून देता आफताब है।
मेरी जिंदगी है क्या,
एक खुली किताब है ।
चुभते नहीं है कांटे
अब राह के मुझे ।
हर कदम पर मिलता
अब चुभता गुलाब है ।
मेरी जिंदगी है क्या,
एक खुली किताब है ।
सुख-दुख की छांव में
चलती है जिंदगी ।
दो पल का सुकून है ,
फिर उलझने बेहिसाब है ।
मेरी जिंदगी है क्या ,
एक खुली किताब है ।
कुछ शिकवा है जिंदगी से ,
कुछ खोने का मलाल भी ।
तू जैसी है सफर-ए-जिंदगी,
बहुत लाजवाब है ।
मेरी जिंदगी है क्या ,
एक खुली किताब है ।
पिंकी मिश्रा

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