रविवार शाम को 5:00 बजे तीनों इंडियन कैफे हाउस में पहुंचकर बेसब्री से मां पापा की पसंद का इंतजार करने लगते हैं। रिक्तिमा कैफे में एंटर करती है और आंटी को देखकर उनकी और बढ़ती है। अंश की पीठ कैफे के दरवाजे की ओर होती है। पास पहुंच कर रिद्धिमा कहती है प्रणाम आंटी अंकल जी कैसे हैं आप? 

अंश इस आवाज को सुन कर आश्चर्य से भर जाता है और पलट कर देखता है वह स्वयं को काबू में करने की कोशिश करता है।  

रिक्तिमा भी अचंभित हो बिना कुछ कह हैरत में पड़ जाती है। 

आंटी कहती है बैठो बिटिया यह हमारा बेटा है हमें तुम पसंद हो इसलिए हम चाहते थे कि तुम्हारी एक बार मुलाकात करवा दे अंश से अगर तुम्हें पसंद आए तो, तुम हमें बाद में बता सकती हो। 

रिक्तिमा बस जी आंटी कह पाती है। 

काफी देर होने के बाद मां अंश से कहती है बेटा आपकी पसंद अभी तक नहीं आई हम उससे मिलने को बेताब है। 

रहस्यमई मुस्कान के साथ वह कहता है मां आपकी और मेरी दोनों की पसंद मेरे बाजू में बैठी है।

आश्चर्यचकित! होकर क्या सच में 

हां मां रिक्तिमा वही है जिससे मैं आपको मिलवाना चाहता था और रिक्तिमा कहती है एकांश आप अंश। 

हां बिटिया हम इसे घर पर अंश कहकर ही बुलाते हैं। 
सभी इस खूबसूरत पल को महसूस कर खुश हो रहे थे कि जीवन में ऐसे भी मोड़ ऐसी भी संजोग होते हैं जब लोग निशब्द हो जाते हैं उस परमपिता के समक्ष। 

पंडित जी से कुंडली का मिलान करवा रिक्तिमा के घर रिश्ता लेकर जाते हैं और बहुत ही शानदार तरीके से दोनों के परिवारों और संबंधियों के बीच में वह परिणय सूत्र में बंध जाते हैं और आज उनकी पहली एनिवर्सरी है। 

तभी डोरबेल बजती है सामने एकांश के साथ मां पापा को देखकर वह खुशी से खिल उठती है। अंदर आते हुए एकांश कहता हैं घर पर मम्मी पापा को मैंने फोन कर दिया है वे रास्ते में है कुछ देर में पहुंच जाएंगे। 

वह एकांश को थैंक यू कहती है। 

दोनों परिवार मिलकर उनके आज के दिन को बहुत ही खुशनुमा बना देते हैं। 

और रात में जब वे एकांत में होते हैं तब 
एकांश रिक्तिमा को कहता हैं, मे आई डांस विद यू 
रिक्तिमा कहती है यस आई  कैन 
फिर डांस और मधुर संगीत के आगोश में वे दोनों डूब जाते हैं।

समाप्त 
यह मात्र एक काल्पनिक परिदृश्य है।