आठ साल की नैना अपने कमरे में टीवी देख रही थी ।
मां ग्रेसी एकदम आई और बोली," Come on Naina .. why aren't you getting ready for school ? Go dear ! Move fast . ( नैना तुम तैयार क्यों नहीं हो रही हो स्कूल के लिए ? जाओ और जल्दी से अपना काम करो ! )
छोटी सी नैना को टी.वी.वाले कार्टून और कहानियां पसंद थी । वह टीवी बहुत देखती ..। उसके ख्यालों में वंडर गर्ल्स, स्पाइडर मैन ,शिनचैन और पावर गर्ल्स नाचता रहता । परियों की फैंटेसी दुनिया में भी भ्रमण कर आती थी । पढ़ाई में कोई खास तरक्की नहीं की थी । एक दम साधारण सी थी पढाई में ।
नैना ब्रश हाथ में ले वॉशबेशन के सामने खड़ी हो गई और अंगड़ाई लेने लगी । मां की नजर पड़ते ही थोड़ा हाथों से दांतों पर ब्रश फेरने लगी । बिखरे हुए लम्बे बाल और नैना अस्त व्यस्त ग्रेसी काफी गुस्से में थी परंतु सुबह सुबह अनचाहा पाठ नहीं सुना सकती थी ।
दांत भींचते हुए पास पहुंची बोली," क्या कर रही हो ? जल्दी करो बेटा बस आ जाएगी !"
ग्रेसी की बातें नैना के कानों में गूंज तो रही थीं पर.......प्रतिक्रिया उतनी स्पष्ट नहीं थी ।
मां चुटिया बनाने पहुंची तो फिर वही बातें जो रोज वह दोहराती थीं अक्सर ...
---"कितनी बार कहा कि,बाल कटवा लो और पापा से भी कहा लेकिन ,मेरी सुनता कौन है यहां ? पापा भी लम्बे बाल कटवाने को मना करते हैं और तुम भी नहीं कटवाने देती हो । झेलना तो मुझे ही है ना, सुबह उठकर गूंथना दो दो चोटी ,कितना मुश्किल काम है ? इतने में चोटी जोर से खिंच जाती ।
नैना धीरे से बोलती ," मम्मी ....क्या ..करती हो बहुत दुखता है ..!"
---"ओहह तो ठीक है बाबा धीरे से करती हूं ."ग्रेसी थोड़ी ठंडी पड़ जाती ।
उधर बस हॉर्न दे देकर घर तो घर अगर बगल पड़ोसियों को भी इतला कर देती कि,नैना को स्कूल के लिए देर हो गई है ।
दुबे आंटी बाहर आकर ड्राइवर से कहती ,"
क्या भईया पूरे मोहल्ले को स्कूल जाना है क्या जो सुबह सुबह हॉर्न .... ?? और तुम रोज ऐसा ही करते हो ?"
ड्राइवर का एक हाथ स्टेरिंग में होता और खिड़की से झांककर बोलता," आंटी जी क्या करूं ? मेरी ड्यूटी है, और रोज की आदत फड़ गई है इनकी ..! फिर भी कुछ ना कुछ घर में छूटा ही रहता है !"
मिसेज दुबे को बड़ा ही मज़ा आता जब सुबह सुबह ड्राइवर से निंदा करती । शायद यही सुबह की दिनचर्या बन चुकी थी उनकी..।
तभी नैना दौड़ी दौड़ी बाहर आती तो, ग्रेसी पीछे पीछे बॉटल ,टिफिन और रूमाल लातीं।
पीछे से चिल्लाती ,"सुनो नैना बेटा तुम्हारे शू - लेस ढंग से बंधे नहीं हैं प्लीज़ listen सही से बांधों उनको नहीं तो गिर जाओगी । "
ग्रेसी की बातों को सुनती भी और नहीं भी नैना बस में झट से चढ़ जाती ।
फिर बस्ते से टिफिन निकाल कर उसमें बनी सिंड्रेला को निहारती और सोचती ," इस बार बर्थडे में मुझे मां से ऐसा ही फ्रौक लेना है जैसा इसने पहना है बिल्कुल ऐसा ही ,रियली लाइक हर ..!(बिल्कुल उसकी तरह)क्या मां उसके लिए खरीदेगी या टाल देगी ? "उसे समझ नहीं आ रहा था ।
बच्चों की कपोल कल्पना भी अलग होती है ..। जहां जरूरतें का तो पता नहीं पर एक अलग सी अनुभूति होने लगती है जिसमें, वह ख्वाईशों को पूरा करने में माता -पिता को मनाने के लिए एक रास्ता ढूंढ ही लेते हैं । जिसे बर्थडे कहते हैं ...।
वह सोच रही थी ---
"बर्थडे आने में काफी दिन हैं ,अभी दो महीने पहले ही तो मनाया था । क्या दिया ? एक मिडी जो, पसंद भी नहीं थी । रंग भी नीला उफ़ ! मां कह रही थी पापा is fired from job !" (पापा को नौकरी से निकाल दिया ) इसलिए इस बार बर्थ-डे सिम्पल ही रहेगा । और मेरे सपनों का क्या ? पूरे होंगें या नहीं ?"
तभी अचानक ध्यान टूटा और कन्डेक्टर बोला," उतरो नैना ...चलो जल्दी .!"
नैना बस से उतर गई और सीधे अपनी कक्षा की ओर मुड़ गई ।
अचानक नैना का ध्यान टूटा और कन्डेक्टर बोला," उतरो नैना ...चलो जल्दी .!"
नैना बस से उतरी और सीधे अपनी कक्षा की ओर मुड़ गई ।
कक्षा में बैग रखा कंवलजीत और नव्या को साथ लेकर मैदान में चली गई । अभी प्रार्थना के लिए बीस मिनट बाकी थे ,तब तक तीनों अपने नाटक के पसंदीदा किरदार बने हुए थे..।
वह नाटक उन्होंने विद्यालय के "वार्षिक- प्रजेंटेशन "में १४ नवंबर को प्रेशित किया था...काफी सराहना मिली थी ।
विद्यालय में अनेकों दोस्त थे लेकिन, कंवलजीत और नव्या से ही उसको विशेष लगाव था ।
नैना सिंड्रेला ,कंवलजीत सौतेली मां और नव्या कभी दर्पण कभी सौतेली बहन ।
जब भी मौका मिलता अपने नाटक का भाग से खेला करते । एक दिन नैना सिंड्रेला बनती तो दूसरे दिन कंवलजीत तो कभी नव्या राजकुमार तो कभी .... किरदारों को अपने हिसाब से बदल देते और अब तो डायलॉग भी अच्छे से याद हो गए थे ।
वह अपनी खूबसूरत दुनियां के खुद ही किरदार थे ..।
जहां ---
सिंड्रेला बनी नैना बोल उठती," ---मुझे बनना है एक सुंदर राजकुमारी , सैंडिल भी मोती वाली ,जिसमें खूबसूरत कारीगरी निराली ..! ला दो एक सुंदर ताज, कोई ना जान पाए वो राज .!"
मां बनी कंवलजीत बोलती,"---ओ ..मेरे दर्पण सोए भाग जगा ,बोल- बोल कौन दुनियां में सबसे सुंदर अपना मुंह खोल !"
तभी नव्या बनी दर्पण कहती,"----ऐ .. रानी सुन एक बात सबसे खूबसूरत है सिंड्रेला , उसके आगे कोई भी सुंदर फूल ना !"
रोज की अनगिनत कहानियां कितनी बार बाल मन रचता और गढ़ता यह कोई नहीं जानता था ।
एक बार देरी भी हुई --
प्रार्थना का समय पूरा हुआ ,घंटी बजी और वे तीनों प्रार्थना -मैदान में भागते हुए पहुंचे ।
यदि ,थोड़ी देर और हो जाती तो ... क्लास टीचर ने टिफिन छीन लिया था ..। दो घंटे तक भूखे रहना पड़ा...और दो पीरियड बाद ही दिया.!
एक दिन --
मैडम एटेंडेंस ले रही थी....। नैना का नाम आया तो ----
मैडम ने पुकारा ," नैना ..प्लीज़ कम हियर ..! "(यहां आओ नैना)
नैना ने अपनी भोली सी बड़ी- बड़ी आंखों से मैडम को देख सहम गई ।
सोचा रही थी नैना--"क्यों बुला रही है मैम ,कहीं कोई शिकायत तो नहीं ..? क्या हो सकता है ? "
धीरे- धीरे मैडम की ओर बढ़ने लगी, क्लास टीचर मोटे मोटे चश्मे से उसकी ओर नजरे गढ़ाए थी ।
--"ओ नैना कम ऑन हरी आप..!"(जल्दी आओ जल्दी ) क्लास टीचर बोली ।
__"यस मिस "(जी ) नैना हल्के से बोली उसका गला रूंघा जा रहा था ।
मैडम की खूबसूरत उंगलियां में अंगूठियों सजी हुई थीं ,उसकी नजर उसी पर जा टिकीं थी, उसके बीच एक कागज दिख रहा था जिसे उन्होंने नैना की ओर बढ़ा दिया और कहा ,"बेटा यह अपने पेरेंट्स को दे देना । कह देना स्कूल में बुलाया है । टू मंथ्स् की फीस का नोटिस है । अगर इस महीने भी जमा नहीं की तो स्कूल से आपका नाम कट जाएगा । ऑके डियर । ऑल राइट ,now you can go to your seat !"(ठीक है फिर ,अब अपनी जगह वापस जा सकती हो)
इतनी खूबसूरत उंगलियां के बीच उन्होंने एक फूल को मसल दिया । उसका हृदय ऊपर तक भर आया । जिसे मैडम नहीं जान सकती थीं ..।
मैडम ने हेडिंग लाइन (शीर्षक ) डाली ----
," Let the flowers be smell , don't pluck them "(फूलों को महकने दो, उन्हें मत तोड़ो)
किसके लिए ...था ये ... अपने लिए या बैठे बच्चों के लिए .?? मैडम की दोहरी मानसिकता साफ़ झलक रही थी ..।
उसने चुपचाप वह कागज बैग के अंदर डायरी में रख दिया ।
और ब्लैक बोर्ड में सफ़ेद चौकों के घेरों में भविष्य के पाठ तैयार करने लगी सभी आम बच्चों की तरह ..।
छुट्टी हो चुकी थी ..वह बस स्टेंड पर उतरी ग्रेसी उसका इंतजार कर रही थी ..वह जल्दी से आगे बढ़ी ग्रेसी ने उसका भारी बैग उठाया और बोली ," बेटा बैग बहुत भारी है ,टाइम टेबल से बुक्स और कॉपीज रखा करो ..। तुमको कितनी बार समझाया है इससे कंधों पर जोर आता है और बड़े होने फर सर्वाइकल होता है ..।"
घर आ चुका था ---
नैना कुछ नहीं सुन पा रही थी --उसका ध्यान नोटिस पर था ।
उसने ग्रेसी की बात बीच में काट दी बोली," मॉम आज मैम ने मुझे एक कागज़ दिया है फीस के लिए और स्कूल में पैरेंट्स को बुलाने को कहा है ..।"
ग्रेसी उसकी बात सुनकर बोली ,"--ओहह ..!dear your father again not submitted the fee ..! How disgusting ?? ( तुम्हारे पिता ने दुबारा फीस जमा नहीं की । कितनी गलत बात है ।) चलो शाम को पूछती हूं ..!"
कहकर नैना के कपड़े समेटने लगी ।
नैना कभी और बच्चों की तरह यूनीफॉर्म गंदा नहीं करती थी । यही बात ग्रेसी को नैना की पसंद थी ।
नैना ने बैग से पर्चा निकाल कर ग्रेसी के आगे बढ़ा दिया । ग्रेसी ने कहा ,"ठीक है अभी पढूंगी तब तक मेज पर रख दो । पहले खाना खा लो.. ।"
नैना ने पर्चा मेज पर रख दिया ।
ग्रेसी बोली ,"बेटा आज आपकी गिट्टू मौसी आ रही है । खुश हो ना ?उनका फोन आया था ..!
नैना की आंखें चमक उठी ,गिट्टू मौसी उसको पसंद थी और वह उससे काफी हिली -मिली थीं । बच्चों में बच्ची गिट्टू मौसी बिल्कुल ..!
सुनंदा ☺️
क्रमशः
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