तु साथ मेरे रहना  ,मै बहकती बहुत हु।
होता है नशा तेरा तो मै महकती बहुत हु।।

कोशिश करती हु मै के चुप चाप सी रहु। 
पर क्या करु नशे मे मुस्कराती बहुत हु।

ना पूछना तु मुझ से मेरे दिल की दास्तान। 
मै नशे मे होती हु तो बात छुपाती बहुत हु।।

खुश रहती हु मै यु तो हस्ती भी बहुत हु।
जब नशे मे होती हु तो खिल खिलाती बहुत हु।।

इस दिल मे तबाही का एक रंज भरा है।
लोग कहते है मै दर्द को छुपाती बहुत हु।।

एक गम भरा नगमा है ।एक दर्द की महफ़िल। 
लोग कहते है मै नशे मे गाती बहुत हु।।
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               रितु शर्मा