हम राष्ट्र की हर बोले बनकर जन-जागरण  की अलख जगायेंगे।
जन-जन में राष्ट्र  चेतना की जागृति ज्वाला धधकाएंगे।।
नई चेतना नए स्वरों में साहस का बिगुल बजाएंगे।
कमर कस ली है हमने अब हार नहीं हम मानेंगे दुश्मन कोई भी आ जाए हम उसको मार भगाएंगे।।
मुश्किल भरा समय है यह आतंक का काला साया है उस को जड़ से मिटा कर हम विश्वशांति को लाएंगे।
जब हर बच्चा हर युवा खड़ा होगा सीमा पर अंदर और बाहर के दुश्मन पाताल में ना बच पाएंगे।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर