प्रश्न-कल एक प्रश्न पूछा गया मुझसे पर ब्रह्म और ईश्वर भगवान में क्या अंतर समानता या अंतर है?
मैंने जो उत्तर दिया था वह निम्नवत है आप सभी विद्वतजन मनीषियों से आग्रह है कि आप अपने विचार अवश्य मेरे उत्तर के परिपेक्ष्य में प्रस्तुत
करने की कृपा करें।
मेरा उत्तर---
ब्रह्म ब्रह्मांड का निर्माता नियंता पर ब्रह्म है ।उसके ऊपर सृष्टि युग में कोई आदि अनादि नही है या यूं कहें कि भगवान कृष्ण की पृथ्वी पर लीला ईश्वरीय अवधारणा में जीवात्मा के नैतिक मूल्यों का प्रदर्शन भगवान का आचरण है तो भगवान राम द्वारा प्राणि मात्र के जीवन के लिये आदर्श प्रस्तुत अपने पृथ्वी प्रवास की प्रेरणा जीवात्म कल्यार्थ भगवन ईश्वर हैं।तो मुँह में माता यशोदा को जन्म जन्मांतर सृष्टि निर्माण विनाश की युगों युगों की सतत प्रक्रिया का दर्शन कराना कौरव सभा मे एव कुरुक्षेत्र में ब्रह्म का वास्तविक साक्षात्कार ब्रह्म है ईश्वरी एव भगवान अवधारणा का सिद्धांत एव प्राणि मात्र के कल्याणार्थ आचरण संस्कृति संकार का बोध ।वही ब्रह्म निरपेक्ष समस्त ब्रह्मांड के कल्याण का मूल स्रोत है।ब्रम्ह ही सात्विक प्रबृत्ति आत्म स्वरूप में प्रतिष्ठापित है जब आत्मा को वास्तविक स्वरूप का बोध हो जाता है तब आत्मा ही अपने वास्तविकता की परम यात्रा भौतिक स्थूल शरीर से प्रारम्भ कर परमात्मा को प्राप्त करती है जैसे सिद्धार्थ से बुद्ध भगवान साधारण परिवार परिवेश में जन्मे जीजस आदि।यह संक्षिप सार है पुत्र आपके प्रश्न का।
कभी कभी संकीर्ण अल्प बुद्धि मानव इसे इस्लाम के उस अवधारणा को स्वीकार करते है कि जब पर ब्रह्म के स्वरूप मत्स्यावतार, कछपावतार ,बाराह अवतार ,बामन अवतार ,परशुराम अवतार ,रामा अवतार कृष्णा अवतार है तो परब्रह्म तो युग मे कभी आया ही नही सभी पैगम्बर ही हैं यही ब्रह्मांड युग सृष्टि प्राणि के आत्म स्वरूप ब्रह्म सत्य का परिहास एव धर्म की विकृत व्यख्या प्रारम्भ होती है जो विकृति का भयंकर स्वरूप धारण कर नकारात्मक विध्वंशक और अहंकारी आत्म बोध की दृष्टि को व्यखित करती है जो ब्रह्म सत्ता को चुनौती देती है और अंत मे भयंकर विनाश।।
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीतांम्बर

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