पापा मेरे पापा कितने प्यारे प्यारे तुम ...
मुन्नी मेरी मुन्नी आँखो का तारा तुम ..
पापा ओ पापा ....मेरे पापा.....
.....
बस कर बेटा ,बहुत नाच गा लिया आज हमने और तुमने ,चलो चलते है जरा किचन मे अब अपनी प्यारी बिटियां के लिये आज क्या स्पेशल डिश बनाऊँ मै ।
नही पापा ,रूको मै बनाती हूँ आज ,आपके लिये कुछ स्पेशल आपकी पंसद का नाश्ता ।
पाँच बर्षीय मनु ने अपने पापा के गले मे बाँहे डालते कहा ...और मन ही मन अपनी माँ की तरह रौब जमाने लगी पापा पर ।
राघव गुप्ता जो पेशे से इंजीनियर है और घर ,आँफिस दौनो को बखूबी सभाँलते है अभी दो महीने पहले उनकी पत्नी रजनी कैंसर,की बीमारी से चल बसी ।तब से राघव माँ और पिता का दायित्व बखूबी निभा रहे है ।
पापा ओ पापा ,कहा खो गये आप ,...मनु ने कहा -
अरे कुछ नही बेटा ।
तो फिर चुप क्यो हो गये हो ,मम्मी की याद आ रही है क्या
बोलो ,बोलो ,पापा
दादी अम्मा मेरी अब बस भी करो ,और चलो किचन की ओर जहाँ बनाते है आज गुलाब जामुन मजेदार ।
मनु खिल खिलाकर हँसती है और पापा के साथ किचन मे जाती है ।
पापा आपको गुलाब जामुन बनाना आता है ।मनु ने कहा.-
राघव ने हँसते हुये कहा- ..ये यू टयूब कब काम आयेगा बेटा ।
राघव गुलाब जामुन बनाते हे और मनु को खिलाते है ।तभी यकायक राघव की आँखे भर आती है ।
मनु को कहानी सुनाते है ,और सुला देते है ।और खुद भी
सोने की कोशिश करते है ,लेकिन नींद आँखो से कोसो दूर
चली जाती है ।
रजनी तुम अचानक क्यो चली गयी हो ,तुम्हारे बिना घर ,घर नही लगता है ,कितनी भी कोशिश करता हूँ फिर भी मनु को माँ का प्रेम नही दे पा रहा हूँ ...राघव सोचते सोचते सो जाते है ।
कैसी बात करते हो तुम राघव ,मै नही कर सकता हूँ ,तुम और हम अलग है क्या ,दो शरीर एक आत्मा है ।तो मै भी तो तुम मे समायी हूँ।एक नही दो दिल धडकते है मि,राघव तुम्हारे शरीर मे ,मै भी हूँ ।तुम बहुत अच्छे पिता हो और अब माँ भी ...माँ भी...रजनी......रजन

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