काफिया - आरा
रदीफ़ - रहूँगा
ताउम्र बन कर तुम्हारा रहूँगा,
चाहतों का बन सितारा रहूँगा।
सितमगर ना ढ़ा इतना सितम,
तेरे हर ख्वाब का बहारा रहूँगा।
दामन फैलाए खड़ा दर पर तेरे,
तेरे बिन जग में बेसहारा रहूँगा।
दिया जो तूने एक नजर प्यार का,
तेरे चमन का बन नजारा रहूँगा।
आफताब बन आ जाओ जीवन में,
"झा"तेरे जीवन का बन उजियारा रहूँगा।
आरती झा (स्वरचित व मौलिक)

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