राधा रानी की छवि बड़ी प्यारी
लगती हैं जन जन को न्यारी
रुनझुन रुनझुन जब पायल बाजे
देख उनको मन हो जाए मनोहारी
माथे की बिंदी लगा कर गजरा
झुमके की चमक बने मनभावन
गोटे की चुनरी, चेहरे की लाली
राधिका बनी कृष्ण की धड़कन
जीवन के रंग से भरी राधा रानी
रागिनी सी बोली मंदाकिनी सी धीर
सजीली शरमाती सुहासिनी सी
राधिका सी छवि ना मिले कहीं
कलाई में भर कर रंगीन चूड़ियाँ
पैरों में महावर,मेंहदी सजी हथेलियाँ
मन में भर कर स्नेह का प्याला
लेकर चलती गोपियों का करवाँ
रिमझिम बारिश सावन की बहार
करे राधा रानी मोहक श्रृंगार
झूला झूले राधिका हो कृष्ण संग
दुनिया देखे प्रेम की अद्भुत फुहार
चितवन पर लिए मधुर मुस्कान
हृदय पर लिख कृष्ण का नाम
प्राणों में भर बाँसुरी का संगीत
करती राधा रानी सम्पूर्ण श्रृंगार
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली
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