पूरे हो सपने मेरे
विश्व बंधुत्व के
दूर हो मानव में
वैमनस्व की भावना
ना दूरियां हों
धर्म और जाति में
एकीकरण हो
संपूर्ण सृष्टि में
मानवता का आवरण हो
ना हो द्वेष का भाव
हर देश खुशहाल हो
विपन्नता का हो अभाव
कृषक फिर झूमे गाए
सावन कजरी के गीत हो
ना सोए कोई भूखा रहकर
रोजगार की जीत हो
हर बच्चा शिक्षा पाए
हर स्त्री को सम्मान मिले
हर वृद्ध शान से जी पाए
ना उसे कभी अपमान मिले
पूरे हो सपने मेरे
बस प्रभु से विनती है इतनी
ना कोई मुझसे दुखित रहे
बस कृपा करो मुझ पर इतनी
संगीता शर्मा "प्रिया"

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