जनक भवन भारी भीर धूम मची राखी की।
जनक लली और सबरी सखियां राखी बांधने,
सब भाईन को।।
भइया लक्ष्मी निधि भाभी सिद्धी करें मनुहार किशोरी जू की।।
राखी बांधें आरती उतारें मंगलगान जय जय पुकारें।
झूला झूले कजरी गांवें मिले उपहार खुशी से नाचे।।
आशा भाग जगो है भारी सुंदर झांकी नयन निहारी।
मांगत हाथ जोर सिर नाये किरपा करो मिथिलेश दुलारी।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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