दिल के वरक जब भावनाओं की कलम चलती है,
शहीदों की अमर गाथाएं मेरी तहरीर में झलकती है।
चाहत है बस एक ही जीवन वतन के नाम है,
रक्त की एक-एक बूंद मेरी आए वतन के काम है।
करती हूँ फरियाद "या खुद तू रहमत इतनी करना,
जिस मिट्टी में जन्म लिया कभी उससे जुदा न करना।
तेरी रक्षा के खातिर हम तूफानों से लड़ जाएंगे,
दुश्मन तो क्या चीज है हम चट्टानों से भिड़ जाएंगे।
फौलादी सा सीना है हम झुकने न तिरंगे को देंगे,
तहरीर और तकदीर में हम जयहिंद फिर से लिख देंगे"।
शीला द्विवेदी "अक्षरा"

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