आओ बच्चों, तुम्हें सुनाएं,
वीर गाथा, लक्ष्मी बाई की,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्,

आओ बच्चों, तुम्हें सुनाएं,
गौरव गाथा, झाँसी रानी की,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्,

ले तलवार हाथ में, बच्ची छोटी,
दूर अंग्रेजों को, करने ठानी थी,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्,

आन बान शान, थी झाँसी की,
बिगुल बजाया,उस वीरांगना ने,
वीरता का, वन्दे मातरम् वन्दे मातरम्,

तीर चलाना, घुड़सवारी करना,
ये खेल थे उसके, बचपन के,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्,

रोद्र रुप उसका देख,भागे अंग्रेज थे,
खूब लड़ी वीरांगना,झांँसी की रानी थी,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम्,

आओ बच्चों, तुम्हें सुनाएं,
वीर गाथा, झाँसी की रानी की,
वन्दे मातरम्, वन्दे मातरम् ।

        काव्य रचना-रजनी कटारे
              जबलपुर ( म.प्र.)