भरे पूरे परिवार मे देखो कैसा नजारा हो गया
देखते ही देखते घर का बंटवारा हो गया
जो कभी अपने थे पल भर मे बेगाने हो गए
जो जान न्योछावर करते थे आज वो अनजाने हो गए
किसकी नजर लगी इनको किसका इशारा हो गया
देखते ही देखते घर का बंटवारा हो गया
खेत खलिहान बंट गए अपने पराये छंट गए
जो रहते थे पास वो पल भर मे हट गए
ये परिवार अहम का मारा हो गया
देखते ही देखते घर का बंटवारा हो गया
छा गई धुंध पलकों पर अपने पराये का ज्ञान नहीं
न प्यार बचा छोटो के लिए और बड़ो का सम्मान नहीं
घर का वो बुजुर्ग मुखिया पल भर मे बेचारा हो गया
देखते ही देखते घर का बंटवारा हो गया
अब कहाँ आखिर जाएगा वो
अब कहाँ पनाह पाएगा वो
जिस घर पर खून पसीना लगाया
अब कैसे देख मुस्कुराएगा वो
यही सोच हुई आँख नम सबकुछ ख़सारा हो गया
देखते ही देखते घर का बंटवारा हो गया
हे ईश्वर बस विनती है इतनी कभी किसी को ऐसा दिन न दिखाना
कि जो आज अपने हैं पल भर मे बन जाएं बेगाना
फिर कोई बुजुर्ग ये न कहे कि
"भरे पूरे परिवार मे देखो कैसा नजारा हो गया
देखते ही देखते मेरे घर का बंटवारा हो गया "
मुकेश लखनवी

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