विदाई के समय स्वाति के पापा ने स्वाति से कहा - बेटा , रविश एक अच्छा और सुलझा हुआ इंसान हैं । वो शिवांश और तुम्हारा अच्छे से ख्याल रखेंगे । तुम भी अपनी कड़वी यादों को पीछे छोड़ कर जिंदगी की एक नई शुरुआत करना । स्वाति अपने पापा के गले लगकर रोने लगी तो स्वाति की मां ने कहा - आप मां - बेटी का रोना हो गया हो तो । मैं भी मिल लूं । स्वाति की मां की बातें सुनकर सब हंसने लगे । माहौल थोड़ा हल्का हुआ और स्वाति की विदाई हो गई । रविश के घर वालों ने सबसे पहले बारातियों को घर पहुंचाने की व्यवस्था की । उसके बाद रविश , स्वाति , सौरभ और शिवांश वो सब एक खुबसूरत सी सजी हुई कार हुई कार से रवाना हो गए । सुबह के ४ बज रहे थे । शिवांश स्वाति की गोद में सो रहा था । स्वाति भी कुछ सोचते हुए सो गई । जाग रहे थे तो सिर्फ सौरभ , रविश और ड्राइवर । सौरभ ड्राइवर के साथ बात कर रहा था । तो वहीं रविश सोती हुई स्वाति और शिवांश को देख रहा था । कि अचानक नींद में स्वाति ने अपना सिर रविश के कंधे पर रख दिया । रविश , स्वाति को देखते हुए कब सो गया । उसे भी पता नहीं चला । इधर सौरभ ने अपना मोबाइल निकाला और उन दोनों की एक प्यारी सी पिक ले ली । कुछ घंटे बाद स्वाति की नींद खुली तो उसने अपने आपको रविश के कंधे पर सोते हुए पाया । एक नज़र स्वाति ने सोते हुए रविश की तरफ देखा और अच्छे से सीधे होकर बैठ गई । तब तक शिवांश भी उठ चुका था । शिवांश - हम कहां जा रहे हैं मम्मा ? स्वाति को समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहे । तभी सौरभ ने कहा - बेटा , हम आपके रियल घर जा रहे हैं । नन्हें शिवांश ने कुछ देर सोचने के बाद कहा - तो अंकल हम नाना के घर में , तो वो हमारा रियल घर नहीं था क्या ? अब सौरभ क्या कहे उसे समझ में नहीं आया । तभी हल्के झटके से एक बड़े बंगले के बाहर कार आकर रूकी । सौरभ , रविश , स्वाति और शिवांश सभी कार से नीचे उतरे । तब तक रविश की बहन और स्वाति की मौसेरी बहन स्वाति और रविश को ले जाने लगे । स्वाति और रविश , शिवांश का हाथ पकड़कर घर के अंदर ले जाने लगे । तभी रविश की बड़ी मां ने सबको अंदर आने से मना कर दिया ....
क्रमशः
रचनाकार
श्वेता सोनी

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