धन्य धन्य हे वीर सपूतों,
धन्य धन्य हे माई के लाल
धन्य देश के नौनिहाल,
दिखाकर अपना कमाल
कर दिया देश को निहाल ।

होता आसान नहीं, छूना आसमान,
आते कई, स्वपन देखते सभी,
पर होता सफल वही
जो रह्ता सदा प्रयत्नरत,
निरंतर संघर्षरत,
है मिलता उसी को विजय्पथ
आज नही तो कल ।

कुछ पाने के लिये
कुछ खोना पड़ता है,
है सफलता का मूल मन्त्र यही,
जो करता अपने 
सुख आराम का त्याग,
लगा रह्ता दिन रात,
उसी को मिलता प्रभु प्रसाद,
सफलता का आशीर्वाद,
मिलती रह्ती प्रसिद्धि ,
बनी रह्ती यश कीर्ति,
चीरकाल ।

आज जो सात सितारे चमके हैं,
है ये एक दिन का खेल नहीं,
वर्षों के नींद और चैन खोये हैं,
अपने एशो आराम,
घर का सुख प्यार त्यागे हैं,
तब जाकर बनायी ये गौरव गाथा,
लहराया देश का विजय पताका,
और हम सब ने गर्व से अपना
सर उठाया  ।।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,डॉली मिश्रा "पल्लवि"✍️