ख्वाहिशें कुछ ऐसी
जो मचलना चाहे ,
धरती आसमान
जहां मिलते हैं ,
उस क्षितिज को छूना चाहें।
उड़ती चिड़िया के ,
पंखों को पाकर ,
आसमान छूने की ,
ख्वाहिश पाली है ,
मैंने
मेरी ख्वाहिशे ,
दूर गगन ,पार
कुछ सतरंगी आहटों में
खोना चाहे ।
सितारों भरे आसमान से ,
कुछ सितारों को ,
तोड़ लाया जाए ।
फिर सितारों को टांग कर,
ओढनी में कुछ इतराया जाए।
ख्वाहिशें पाली मैंने ,
क्षितिज को छूने की ,
कुछ पाने की लालसा में ,
कुछ थोड़ा सा भागा जाए ।
बुलंदी का आसमान भी,
मेरे कांधे को छूकर,
इठलाएगा जरूर ।
कुछ ऐसी ख्वाहिशें पाल ली मैंने।।
जया शर्मा (प्रियंवदा)

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