ये वीर जवान हैं जो निरस पथ पे चाँद सूरज सा चमके हैं, 
लिपट कर तीरंगे से शहीदों के शव फिर से जी उठते हैं, 
इस वतन की माटी जितनी वंदनीय है, 
उतने ही परम पूज्य है ये वीर जवान है, 
मातृभूमि के प्रति समर्पण इनका सराहनीय है, 
व्याकुल नेत्रों से नभ का भार उठाते है, 
चिर के सीना दुश्मनों का उस माटी पे हिंदुस्तान लिख आते है, 
सहेज लेते है रग रग में लहर देशभक्ति की, 
भेद कर छनी करते कलेजा औकात दिखा देते ये दहशतगर्दी की, 
हर सांस मे अमर बलिदान का जज्बा रखते है, 
चूम कर इस वतन की माटी को शत्रुओ पे गोलिया बरसाते है, 
वतन की इस माटी में वीरों के लहू का कतरा कतरा मिला है, 
खुद की बलि चढ़ा कर भारत माँ की रक्षा में, 
एक तिरंगे की आन की खातिर हर दर्द खुशी खुशी झेलते है, 
माँ भारती की गोद में स्थान मिलता इनको, 
इस वतन की माटी का कर्ज़ चुकाने के लिए,
न्यौछावर कर देते वो तन मन जीवन को, 
भारत की शान में लड़ते ये वीर सपूत धुरंधर है, 
शहीद होकर जो बढ़ाते गौरव इस माटी की, 
उन शहीद वीरों को रानी की कलम से सत् सत् नमन है ।

रानी साह
स्वरचित एवं मौलिक रचना
कोलकाता ( पश्चिम बंगाल)