************************************







पानी ही पानी चारो ओर बारिश का पानी।
घनघोर बरसे मेघा रात दिन गिर रहा पानी। 

बाढ़ आगई है नदियों में डूब रहे गाँव शहर।
कछार में बसे हुए जो उन पर है बुरा असर।

जीना हुआ मुश्किल उनका खाना न पानी।
बिजली भी काटे पोल डूबे हैं अथाह पानी।

नावों से जा एनडीआरएफ लगी बचाने में।
खाद्य सामग्री शासन से ले कर पहुँचाने में।

यूपी बिहार पश्चिम बंगाल केरल गुजरात।
राजस्थान मध्यप्रदेश उत्तराखंड महाराष्ट्र।

त्राहिमाम त्राहिमाम चहुँओर है मचा हुआ।
लैंड स्लाइडिंग बादल फटना रोज है हुआ।

कितनों की जानें जाती हैं ये जल प्रलय से।
कितनी गृहस्थियाँ डूबीं प्राकृतिक प्रलय से।

कटते जंगल इस विनाश का एक कारण है।
वृक्षारोपण भी न करते दूसरा यह कारण है।

भांठ कर तालाबों को इमारतें बनने लगती।
जल भराव होये इससे गन्दगी ये आ लगती।

संक्रामक बीमारी फैले जलभराव व बाढ़ से।
खदानें भी कारण बनती हैं आई हुई बाढ़ के।

खेलिये ना प्रकृति से खिलवाड़ बंद कीजिये।
लीजिये प्रकृति आनंद सौंदर्य दर्शन कीजिये।

बिगाड़िये ना संतुलन पर्यावरण संरक्षण करें।
नदी पहाड़ जीव जंतु पेड़ ताल सरंक्षण करें।


रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव