प्रहरी का दरबार में प्रवेश
क्या समाचार लाए हो _राजा ने प्रश्न किया।
महाराज राज्य के कुछ किसान आपसे मिलना चाहते हैं।
अच्छा!भेज दो उनको _राजा ने कहा।
(प्रहरी जाता है ,और किसानों को भेजता है)
किसान_ महाराजा की जय हो ,अन्नदाता हमें बचा लो।
आप जानते हैं ,इस बार अकाल के कारण फसल नहीं हुई है,घर में खाने का दाना भी नहीं है ,ऐसे में हम कर कैसे दे पाएंगे सरकार ?
राजा _तो क्या चाहते हो ,तुमलोगों का कर माफ कर दें।
जी सरकार _किसानों ने एक साथ कहा।
ठीक है,इस महीने का तुमलोगों का कर माफ किया जाता है।
मुनादी कराई जाती है _
,(सुनो सुनो सुनो .... नेक,रहमदिल ,हमारे राजा ने राज्य के सभी किसानों का इस महीने का राजकीय कर माफ कर दिया है।)
राज्य के सभी किसानों में खुशी की लहर दौड़ जाती है।
इधर राजदरबार में राजा चिंतित हो जाते हैं,और सभी मंत्रियों ,सभासदों की बैठक में राजा ,प्रश्न करते हैं_
बार बार सूखा पड़ने से राज्य में आम जन और राजकोष की स्थिति बिगड़ती जा रही है,राज्य के लोगों का दूसरे राज्यों में पलायन भी शुरू होने लगा है।
इसका उपाय समझ में नहीं आ रहा।
राजपुरोहित जी ,आपके पास इस दैवीय आपदा का कोई उपाय है।
सभी की निगाहें राजपुरोहित के ऊपर आकर टिक गई।
महाराज राज्य में बहुत सारे हवन ,अनुष्ठान कराए गए ,लेकिन इंद्र देव की कृपा नहीं हुई ,मैंने हर संभव प्रयास किया ,अब तो भोलेनाथ ही रक्षा करें,और कोई चमत्कार दिखावें_राजपुरोहित ने कहा।
राजा के मस्तक पर चिंता की रेखाएं स्पष्ट दिखाई दे रहीं थीं।
सभा का समापन होता है।
राजमहल में राजा बेचैन थे ,रानी भी राज्य की स्थिति से अनजान नहीं थी ,दुश्मन राज्यों के आक्रमण का खतरा भी इस समय बढ़ जाता है ,जब राज्य की जनता भूखी और लाचार हो ,और राज्य भी तंगहाली में गुजर रहा हो।
फिर भी उन्होंने राजा को समझाया _ आप परेशान न हों हमारे इष्ट महादेव जरूर कोई न कोई राह दिखायेंगे।
अगले दिन राजदरबार में सभा शुरू होती है कि प्रहरी का पुनः प्रवेश होता है ।
महाराज की जय हो। कोई साधु आया है,अजीब सी भाषा बोलता है ,कह रहा राजा से मिलना है।
उन्हें आदर के साथ अंदर ले आओ_राजा ने आज्ञा दी।
(साधु का प्रवेश)
उसकी बातों से पता चला कि वो एक तांत्रिक है ,और मिजोरम से आया है और उसका नाम कपिला है।
उसने राजा से इस आपदा को खत्म करने के लिए एक मंदिर बनवाने का सुझाव दिया।
राजा सहर्ष तैयार हो गए।
पहले मेंढक की बलि दी गई ,मेंढक उर्वरता का प्रतीक है ,फिर उस जगह भव्य मंदिर का निर्माण तांत्रिक परिकल्पना के आधार पर किया गया।लोगों को रोजगार मिला। मांडुक तंत्र से स्थापित इस मंदिर का स्थापत्य अद्वितीय है। कहते हैं उसके बाद इंद्र देव की कृपा से खूब बारिश हुई और राज्य फिर से खुशहाल हो गया।
मेंढक मंदिर
लखीमपुर खीरी में स्थित इस मंदिर का निर्माण ओयल राजा बख्त सिंह द्वारा कराया गया था। इसकी वास्तु संरचना इस प्रकार से है की सामने से देखने पर ऐसा लगता है कि मंदिर मेंढक के उपर बनाया गया है। गर्भगृह में भगवान शिव विराजमान हैं।
यह मंदिर अन्य मंदिरों की तुलना में भिन्न है जो इसे बड़ा रहस्यमई और फलदायी बनाता है।
_ यह देश में इकलौता मेंढक मंदिर है, जहां पूजा तो महादेव की होती है लेकिन कहलाता मेंढक मंदिर है।
_ कहते हैं बाणासुर भगवान शिव का अनन्य भक्त था,नर्मदा में वो रोजाना शिवलिंग बना प्रवाहित करता था जो पत्थर के हो जाते थे।
राजा बख्त सिंह ने जब नर्मदा नदी में छलांग लगाई तो उन्हें शिवलिंग की प्राप्ति हुई।
कहा जाता है कि ये शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है।
_ आज तक जितनी भी नंदी की मूर्तियां हमने शिव मंदिरों में देखा है ,वो बैठी ही मिलती हैं,लेकिन यहां की नंदी की मूर्ति खड़ी है।
_ यहां एक कुआं है,जिसमे कभी भी जल कम नहीं होता ,लोग यहीं का जल शिवलिंग पर चढ़ाते हैं।
_ यहां एक सुरंग भी है जो अब बंद हो चुका है,यह राजमहल से जुड़ा था,जहां से रानी ,आकर मंदिर में पूजा कर महल वापस लौट जाती थीं,उन्हें कोई देख नहीं सकता था।
_ मंदिर के गुम्बद में लगे नटराज की मूर्ति के साथ एक तांत्रिक चक्र है,जो उस समय सोने और चांदी का बना था।वह सूर्य की दिशा में घूमता है।
सरकारी उपेक्षा का शिकार ये मंदिर धीरे धीरे जर्जर हो रहा है। वास्तु स्थापत्य संरचना की दृष्टि ये मंदिर अत्यंत अनूठा है ।इसे संरक्षित करने की आवश्यकता है।श्रावण और दीपावली में यहां भक्तों का तांता लगता है ,वैसे तो इस मंदिर को देखने दूर दूर से लोग आते हैं,लेकिन बदहाली पर थोड़ी निराशा तो जरूर हाथ लगती है।

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