खुशियों के दीप प्रज्जवलित होने लगे थे मन के अंधेरे में कहीं !!


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अब आगे ----

गिट्टू की गाड़ी रूकी , इस बार मर्सिडीज वो भी अपग्रेड वर्जन , स्टाइलिश  ,लक्जूरियस कार.! बाहर से ही आवाज दी और हॉर्न भी बजाया...। 

छज्जे से नैना की बॉलकोनी से सब स्पष्ट नजर आता था ..!

उसने देखा मौसी हाथ में सफ़ेद स्कार्फ बांधा हुआ था और जोर जोर से हाथ हिला रही थीं ..। आवाजें लगा रहीं थीं,...."ओ नैना ,नैनी ....!! आओ भी देर हो रही है ..!"
उसने हाथ हिलाया और बोल,__"आ ..रहीं हूं मासी ..!"

उधर मिसेज दुबे ने देखा , नैना से जुड़ी अनचाही दुश्मनी तो उनको बचपन से थीं ..!  गिट्टू को बाहर देख अजीब मुंह बनाया और सटाक से दरवाजा मुंह पर बंद कर दिया ।

इधर ग्रेसी नैना को बैग में जरूरी सामान स्नेक्स वगैरह रख रही थी ,.."नैना ... कुछ तो खा लो ...!" 
नैना आधी ब्रेड मुंह में और आधा बाहर निकालते हुए तेजी से बाहर की ओर दौड़ी ..।

---"नो ममा ..इट्स इनफ !!(ये बहुत है अब नहीं )ऑके बाय ..! फिर मिलती हूं ..!"

कहते हुए बाहर की तरफ भागी ..।
ग्रेसी के मन में विचार आ रहे थे ,---"कितनी जल्दी बड़ी होती हैं लड़कियां..!! कमरे में टंगे फोटो कालेज को निहारने लगी..!!

कार का दरवाजा खुला था ..। हल्का सा म्यूज़िक लगा था ..। 

गिट्टू और नैना अपनी सीटों में यथावत बैठ गए...
अचानक गिट्टू चौंकी ,---" ओ हो ...क्या बात है डियर ..!! तुमने भी हाथ में रूमाल बांधा है.. यू लुकिंग सो स्टाइलिश डॉल ..!"(पहनावे से अच्छी लग रही हो)

नैना शर्माते हुए बोली ,----" मासी दिस इज फॉर यू !"(ये आपके लिए है )

गिट्टू,"__ओ नाइस प्रिटि गर्ल ..!"(अच्छा है प्यारी लड़की )

कार की रफ्तार तेज हो रही थी ...पेड़ ,पोखर , बिल्डिंग पीछे जा रहे थे और वे शहर से दूर होते जा रहे थे ...

नैना खिड़की से खूबसूरत दृश्यों को कैद करना चाहती थी ..।  छोटी सी मुठ्ठी में तारों और आसमां सी चाहतें को कैसे कैद करे ? अभी  तितली आसमां को नहीं छू सकती थी;  पंखों के झुलस जाने का भय था ..।

कार रूकी.....
नैना ,गिट्टू के पीछे पीछे हो ली ..। उसे डर लगा क्योंकि , मां-बाप के बिना पहली बार अकेले  मौसी के साथ आई थी ..। 

एक बड़ा सा वेटिंग हॉल,  बाहर सोफे  और टीवी लगा था ..।  मौसी ने उसे रूकने को कहा और अंदर एक कमरे में चली गई । 

मौसी को गए एक घंटा गुजर चुका था ..। वह बहुत बोर हो रही थी..। कुछ मां के दिए स्नैक्स चबा लिए ,फिर भी, गिट्टू ना आई तो उस कमरे की ओर बढ़ने लगी जिहां गिट्टू गई थी ..।

वह धीरे- धीरे जा रही थी ..।

कमरे में बहुत शोर सुनाई दे रहा था ..। कमरे के बाहर लिखा था .."डायरेक्टर/प्रोड्यूसर "
"मिस्टर कमल राय "।

उसने धीरे से झांककर देखा ..।एक घनी दाढ़ी वाला व्यक्ति  गिट्टू पर चिल्ला रहा था ..। दो चार लोग इर्द-गिर्द खड़े थे ।

गिट्टू जोर जोर से चिल्ला रही थी   ,--"आप ये कैसे कर सकते हैं ? मेरी फिल्म किसी और को दी ? जबकि  ,तीन महीने पहले मैं साइन कर चुकी थी ..! बोलिए राय साहब ..?" 

वह भी आगबबूला हो रहा था,---" अरे ..!! यह क्या बात हुई वंदिता ..? तुमको मालूम है फिल्म की डिमांड थी और तुम पर वह रोल सूट नहीं हो रहा था, तुमको बड़ी बहन के किरदार का रोल मिला तो है ना बस ..! ज्यादा बोली तो फिल्म से हाथ धोना पड़ सकता है ...समझी तुम ..!"

गिट्टू भी तमतमा रही थी ,--" कॉन्ट्रैक्ट तो मेरे साथ साइन हुआ था । ऑके आई विल सी यू ..(मैं देखूंगी तुमको ) केसै मेरा रोल उस कामिनी को दिया ??..! इट विल नॉट ऑवर ..!"(यह खत्म नहीं होगा )

वह शख्स फिर बोला,--" जाओ ...तुम जैसे कई मिल जाएंगे ,सड़क पर आ जाओगी तुम . समझी जो मिल रहा है ले लो ,,.!"

गिट्टू बोली,----"अरे सुन लो तुम भी , मैंने हार मानना नहीं सीखा गांठ बांध लो ..! वंदिता डरती नहीं. ..किसी से भी !"

शख्स उंगली आगे करके रौब से बोला ,---"यह भी नहीं मिल पाएगा बाद मैं ..यह समझना पत्थर पलट गए आपके .. दिन गए.!"

गिट्टू बहुत परेशान दिखीं ..। वह चुपचाप कमरे से बाहर आ गई । 

कड़वा सच...!!

फिल्मी चमक सोने जैसी और दलाली हीरे की मुंह काला कर ही जाती है .।  खो जाती है अनगिनत सितारे व प्रतिभाऐं ..ऐसे ही वक्त के हाथों ।

दिन रात की मेहनत चाहिए काम चाहिए और पैसा बेहिसाब ..लोगों के लिए मात्र तीन घंटे का शो ..उसके पीछे बरसों की मेहनत ..! हासिल गुमनामी के अंधेरे ..दबी हुई आरजुऐं ,कुचले हुए अरमान सभी कुछ दांव पर है केवल एक शो के लिए । पी.वी. आर. व मल्टिप्लेक्स सिनेमा की रौनक बस और कुछ नहीं..।  कितने -कितने फूल इस तरह रौंदे जाते हैं जिनकी कहानियों का जिक्र तो होता है लेकिन फिक्र कभी नहीं की जाती..।


उधर एक 'स्क्रिप्ट राइटर '  से गिट्टू को मिलना था कहानी के लिए ..नैना को लेकर पहुंची । 

बाहर एक लम्बा सा आदमी झोला टांगे ,बड़ी -बड़ी दाढ़ी मूछे ,खादी का कुर्ता पायजामा पहने हुए खड़ा सिगरेट सुलगा रहा था ,बिखरे हुए बाल ,एक पेन जेब में लटका था और चश्मे पर उसका धागा लटका था ।

उसकी आंखों में अजीब सी कसक थी ।
नैना विवशता से पूछी ,---" मौसी यह कौन हैं ? अजीब लग रहें हैं । "

नैना के हाथ को दाबकर कोने में ले गई गिट्टू ,---" श्श्श्श् ....अरे धीरे से ..यह लेखक 'सत्य मिश्र' हैं । अच्छा ! जिनकी कहानियां अक्सर हिट फिल्म के लिए लिखी जाती हैं ..।"

नैना आश्चर्य से ,--"अच्छा.. !! मासी ..!!ओ,...तभी ऐसे हैं ...! फेमस हैं ना !"फिर मुस्कुरा दी ..।

बाहर लेखक सत्य ने ना जाने कितनी सिगरेट फूंक डाली  । वह भी परेशान लग रहे थे । तभी अंदर से एक स्पौट -ब्वाय बाहर  आया और दोनों को अंदर आने को कहा ।

नैना को लेकर गिट्टू भी अंदर जा पहुंची ।
अंदर बेहतरीन फर्नीचर युक्त कमरा सुंदर पेंटिंग्स दीवारों का क्या कहना मॉडर्न आर्कटिटेक्चर की मिसाल एक दम कला अनुरूप । बड़े लोगों के टेस्ट भले ही बड़े हों कमरों की दीवारों की सजावट को फीकी नहीं पड़ने देते हैं..।


उधर लेखक बैठे अपना सर खुजा रहा था और एक लम्बा सा कश खींचकर बोले ,----" आपको पता है महाशय हमारी नई फिल्म की कहानी चोरी हो गई है ..वो भी बड़े बैनर वाले सेम टू सेम स्टोरी मेरी उठा ले गए हैं ..। किसने मेरी प्रति को  बेचा है ?  कॉपी राईट ..एक्ट में अंदर करवा दूंगा । "

स्क्रिप्ट राइटर धीरे से बोले, ---" जरा मिश्र जी धीमी आवाज से बोलिए बगल का भी ख्याल रखिए ।"

इधर उधर देखते हुए बोले ,---" जिसकी संवेदना चोरी होती हैं ..तो वे कैसे धीरे बोल सकता है ..मैं चोर नहीं हूं क्यों बोलूं धीरे ? सबको पता होना चाहिए क्या हो रहा है यहां !"

"शांत -शांत मिश्र जी पता करते हैं जल्द ही.. ।"कहते हुए राय ने नौकर से चार कप लाने का ऑर्डर दे दिया ।

कुछ देर मौसी ने बात की और कमरे से बाहर निकल आए ।

नैना के लिए समझना अभी टेढ़ी खीर ही थी ..।

अभी जानना था बहुत कुछ ..। गिट्टू मौसी के दुख पहली बार उसकी आंखों में चुभे थे ।
मासी बहुत ही परेशान थी .. मौसी ने बैग से कुछ ऐसा निकाला कि वह भौंचक रह गई ।

एक ....

सुनंदा ☺️

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क्रमशः