एक दिन उसने फैसला किया , कि आज वह सलिल से बात करके ही छोड़ेगी,या तो उसे जॉब करने दिया जाए या कुछ दिन वो बाबा के पास चली जाए,उसे इतने बड़े घर में घुटन हो रही । सलिल का प्यार जो उसके प्रति कॉलेज के समय था जैसे काफूर हो चुका था।
सलिल रात को लड़खड़ाते कदम से कमरे में घुसा ।उसने शराब पी रखी थी।
स्नेहा ने उसे सहारा देकर बिस्तर पर लिटा दिया,उसके जूते खोले ।
कुछ बोलती उससे पहले ही उसने खर्राटे मारने शुरू कर दिए।
रात भर वो सो न सकी ।उसने फैसला किया कि ,आज सबके सामने ब्रेकफास्ट टेबल पर ही बात करूंगी।
सुबह सभी ब्रेकफास्ट टेबल पर थे। स्नेहा कुछ कहती उससे पहले सलिल के डैडी ने कहना शुरू किया_
"वरुण की मम्मी ।
जी_स्नेहा की सास ने कहा।
मैं देख रहा हूं , छोटी बहु बहुत उदास रहती है ,नई नवेली बहु है ,अभी तो इसके घूमने फिरने के दिन हैं।
आगे बात बढ़ाते हुए_सारी मेरी ही गलती है, सलिल को मैंने ही बहुत काम दे रखा है,बेचारा बहु के लिए समय नहीं निकाल पा रहा।
मैं सोच रहा हूं कि कुछ दिनों के लिए ये लोग बाहर घूम आएं,तुमलोगों की क्या राय है?
स्नेहा बहुत खुश हो गई कि ,कम से कम ससुर ने उसके दिल की बात समझी।
सबने हामी भरी।सलिल ने थोड़ा प्रतिरोध किया फिर तैयार हो गया।
दोनों की टिकट स्विट्जरलैंड की बुक करा दी गई। एक सप्ताह का टूर।स्नेहा को लगा जैसे उसकी मन की मुराद मिल गई।
वो पहली बार हवाई यात्रा करेगी ,वही सोच सोच रोमांचित हो रही थी।सलिल उसकी खुशी को देख हौले से मुस्कुरा रहा था।
वह पैकिंग कर रही थी ,तभी उसकी सास उसके कमरे में आई ,और ढेर सारा गहना उसे दिया।
उसने कहा ये क्या है मम्मी जी ?
उसकी सास ने कहा नई नवेली बहु जा रही है ,कुछ गहने तो होने चाहिए!
पर मम्मी हमलोग तो हनीमून के लिए जा रहे ,गहनों का क्या काम।
अभी रख ले ,वहां नहीं पहनना होगा तो वहां के बैंक के लॉकर में रखवा देना_सास ने कहा।
पर मम्मी जी यहां भी तो बैंक हैं_स्नेहा ने कहा।
तुझसे जितना कहा जाए उतना ही कर ,ज्यादा सवाल करने की जरूरत नहीं_सास गुस्से से बोली।
उन्हें गुस्सा देखकर स्नेहा चुप हो गई।उसे क्या पता था कि वे लोग अपनी काली कमाई स्विट्जरलैंड के बैंक में रखते थे।
पूरा परिवार उन्हें सरदार बल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट अहमदाबाद से नई दिल्ली जाने के लिए छोड़ने आया।वहां सलिल को कुछ काम था ।अगले दिन दिल्ली से सुबह 5 बजे की फ्रैंकफर्ट की फ्लाइट थी।
फिर फ्रैंकफर्ट से ज्यूरिख स्विट्जरलैंड।
जहाज में बैठना उसके लिए परी कथाओं जैसा था,बादलों के बीच से निकलती ,नीचे बड़े बड़े मकान ,छोटे दिखते, निकलते जा रहे थे।
नई दिल्ली पहुंच कर उन्होंने रात स्टे किया ,सलिल अपने काम निपटा कर रात को लौटा ।
आज शादी के बाद पहली बार वो दोनों घर से बाहर निकले थे।स्नेहा की तमन्नाएं अंगड़ाइयां ले रहीं थीं।
सलिल आया ,लगता था कि काफी थका है। उसने कहा मैंने खाना खा लिया है ,तुम रूम में ही खाना ऑर्डर कर दो।मुझे नींद आ रही ,सुबह 3बजे ही उठना है ।गुड नाईट।
स्नेहा ने रूम में ही खाना मंगा लिया,चुपचाप खा कर सो गई।
सुबह तैयार होने के समय सलिल ने कहा ,स्नेहा गहने पहन लो।स्नेहा ने गहने पहन लिए।वहां एयरपोर्ट पर उसके पहने गहनों का वजन कर रसीद उन्हें दे दी गई।इमिग्रेशन क्लियर करा ,उन्होंने फ्रैंकफर्ट की फ्लाइट पकड़ी ।
उसके बाद फ्रैंकफर्ट से 3 घंटे इंतजार के बाद उनकी ज्यूरिख की फ्लाइट थी।
स्विट्जरलैंड
नए युगलों का पसंदीदा हनीमून डेस्टिनेशन।
उसने सुन रखा था ,यहां बहुत ही हिंदी फिल्मों की शूटिंग हुई थी ,वो सब कुछ देखना चाहती थी ,हर पल सलिल की बाहों में अपना समय बिताना चाहती थी।एक एक पल जीना चाहती थी।तमन्नाओं के जैसे पंख लग गए थे।
ज्यूरिख पहुंच कर उन्होंने होटल में चेक इन किया। थकावट बहुत थी,इसलिए कहीं घूमने जाने की इच्छा नहीं हो रही थी।
होटल की बालकनी से झील का सुंदर नजारा दिखता था।
अगले दिन दोनों ने पहले जाकर यूबीएस (बैंक ) में ज्वैलरी रखवाई।
अब वो घूम सकते थे आराम से।उन्होंने स्विस पास बनवाया ,एक फिक्स स्विस मुद्रा देकर, ये पास पब्लिक टांसपोर्ट के लिए नियत अवधि के लिए मिलता है उसके बाद आप कहीं भी ट्रेन,बस से घूम सकते हैं।
स्नेहा बहुत ही रोमांचित थी ,हर जगह पहाड़,झीलें वहां की प्राकृतिक सुंदरता देख वह फूली नहीं समा रही थी।
यहां का 60%हिस्सा आल्पस पर्वत से ढंका है।
वो लोग इंटरलेकन पहुंचे ,बहुत खूबसूरत जगह ,यहीं दिलवाले दुल्हनियां की शूटिंग हुई थी,होटल विक्टोरिया में उनकी पूरी टीम रुकती जगह जगह खूबसूरत लोकेशन पर शूटिंग होती।यहां पर यश चोपड़ा की आदमकद मूर्ति भी लगी है।
उसके बाद पैराग्लाइडिंग का मजा लिया दोनों ने ,ऐसा लग रहा था जैसे वे अपने कॉलेज के दिनों में लौट आए हों।बेफिक्री,बिंदास अंदाज,एक दूसरे के बाहों में बाहें डाले।
जुंगफ्राऊ ,से लूसर्न और वहां से गोंडोला से
माउंट टिटली, ऊंचाई से देखने से सब कुछ इतना अचंभित करने वाला था कि ,वो शब्दों में बयां नहीं हो सकता, ग्रोटो ग्लेशियर, राइन नदी में बोटिंग ।ऐसा लगता जैसे सबकुछ सपना हो।

स्नेहा ने यह महसूस किया कि इतनी रोमांटिक वादियों में सलिल उसके साथ शरीर से था ,पर मन उसका कहीं और ही था।
आज उनका अंतिम दिन था ,रात की फ्लाइट थी,स्नेहा के हाथ में हाथ लेकर ,हाथों को चूमते हुए ,सलिल ने कहा _डार्लिंग हम कल इंडिया पहुंच जाएंगे।उसके बाद काम के कारण ,मैं तुम्हें समय शायद नहीं दे पाऊंगा।
पर मैं घर में रहकर बोर हो जाती हूं,बहुत सी नकरात्मक बातें मुझे घेर लेती हैं ,प्लीज मुझे कंपनी ज्वाइन करने दो_स्नेहा ने कहा।
अच्छा बाबा ठीक है ,इस बार मैं डैडी से बात कर कुछ न कुछ काम तुम्हें भी दिलवा दूंगा।
अब खुश _सलिल ने हंसते हुए कहा।
हां,ठीक है _स्नेहा बोली।
तुमलोगों ने मुझ गरीब को दुनिया की हर खुशी दी है ,मैं भगवान का कैसे शुक्रिया अदा करूं _स्नेहा भावुक हो गई।
सलिल ने स्नेहा को बाहों में भर लिया ,और उसके गेसुओ से खेलने लगा ,धीरे धीरे कामावेग ने दोनों को अपने आगोश में ले लिया।उनका हनीमून पूरा हुआ।
एक सप्ताह की अविस्मरणीय यात्रा कर दोनो वापस घर आ गए।
फिर से वही सामान्य दिनचर्या शुरू हो गई।यदा कदा वो ऑफिस भी जाने लगी ,वहीं विशाल (जिसके घर इस समय स्नेहा रह रही थी) से उसकी भेंट हुई थी।
एक दिन सलिल ने कहा ,_ तैयार हो जाओ,कुछ फॉरेन के क्लाइंट आए हैं,होटल चलना है उनसे मिलने।
ओके _मैं अभी तैयार होकर आती हूं।
स्नेहा ने शिफान की गुलाबी साड़ी,गुलाबी लिपस्टिक , आंखों में काजल ,जूड़े में गुलाब के फूल लगाकर जब खुद को आईने में देखा तो खुद ही शरमा गई,वह इतनी खूबसूरत लग रही थी कि उसकी खूबसूरती देख चांद भी जमीं पर उतर आए।
वो सीढ़ियों से उतरती नीचे आ रही थी,और सलिल उसे एक टक निहार रहा था। जेठानी और सास अजीब सी नजर से उसे देख रहीं थी।
वह उतर कर आई तो ,सलिल ने धीरे से उसके कानों में फुसफुसाकर शरारती लहजे में कहा_गजब ढा रही हो,कमरे में चलें क्या?
स्नेहा शरमा गई बस इतना ही कहा_ धत्त,तुम्हें भी न असमय मस्ती सूझती है।
फिर दोनों कार से होटल पहुंचे।
मिस्टर माइकल,और मिस्टर रॉबिन दो लोग उनका एक रिजर्व टेबल पर इंतजार कर रहे थे।
सलिल ने दोनों से हाथ मिलाया,और फिर बात शुरू होने लगी । उसमें से माइकल तो सलिल से बातें कर रहा था ,वहीं रॉबिन स्नेहा को लगातार अजीब सी नजर से घूरे जा रहा था ।स्नेहा खुद को बहुत असहज महसूस कर रही थी।
उसे बहुत गुस्सा आ रहा था ,अगर सलिल का क्लाइंट नहीं होता तो आज उसकी हिमाकत पर जरूर सबक सिखाती।
थोड़ी देर बाद वो इशारे से सलिल को कोने में बार के पास ले गया वहां दोनों में कुछ बात हुई,वहीं उन्होंने ड्रिंक पिया। माइकल पहले से ही ड्रिंक पी रहा था। फिर सलिल वापस अपनी टेबल पर लौटा तो बहुत खुश था।
रॉबिन बात करके चला गया था ,और सलिल के टेबल पर आते माइकल ने भी सलिल से बिदाई ली।
अब बच गए थे ,सलिल और स्नेहा।
,स्नेहा ने गुस्से से कहा _कैसे कैसे लोग हैं ,आया था बिजनेस डील करने ,और मुझे घूर रहा था,जंगली आदमी ।
तुम्हें पता है आज कितनी बड़ी डील तुम्हारी वजह से हुई है,तुम मेरी लकी चार्म हो_सलिल ने स्नेहा की बातें अनसुनी करते हुए कहा।
अच्छा !! तो डील फाइनल हो गई _स्नेहा ने अचंभे से पूछा।
हां डार्लिंग ,मिस्टर रॉबिन ने हामी भर दी है,अभी वो पेपर थोड़ी देर में देंगे।
वाह_स्नेहा खुश हो गई।
अभी दोनों डिनर ही कर रह रहे थे,स्नेहा की आंखें बोझिल हो रही थीं,जैसे नींद आ रही हो।
तभी सलिल का फोन बजा ,सलिल ने फोन उठाया ,उधर से डैडी की आवाज सुनाई दी ।सलिल बेटा ,तुम जल्दी घर आ जाओ ,वरुण (बड़ा भाई) का एक्सीडेंट हो गया है।
जी डैडी ,मैं अभी आता हूं_सलिल ने फोन कटते ,ही स्नेहा से कहा _स्नेहा मुझे जल्दी हॉस्पिटल पहुंचना पड़ेगा,वरुण भैया का एक्सीडेंट हो गया है।
प्लीज वो एग्रीमेंट तुम मिस्टर रॉबिन से ले लेना ।
स्नेहा का एक मन किया कि इनकार कर दे,वह उस गंदे व्यक्ति से दुबारा मिलना नहीं चाहती थी,लेकिन फिर उसने सोचा इतनी बड़ी डील है ,आदमी का क्या भरोसा कब मुकर जाय।इसलिए उसने हामी भर ली।
सलिल ने कहा _स्नेहा तुमने मेरा बहुत बड़ा बोझ हल्का कर दिया ,थैंक्स डियर।मैं रॉबिन को बोल देता हूं कि जल्दी तुम्हें दे दे,एग्रीमेंट।
मैं प्राइवेट टैक्सी से जा रह हूं और तुम्हारे लिए कार छोड़ रहा हूं।
ठीक है, बाय ,हॉस्पिटल पहुंचकर मुझे बताना कैसी तबियत है ,वरुण भैया की_स्नेहा ने कहा।लेकिन इधर स्नेहा की आंखें बोझिल हो चुकी थी ।
ठीक है_सलिल ने कहा ,और चला गया।
अभी 5 मिनट ही बीते होंगे सलिल को ,एक वेटर पर्ची लेकर आया , उसमें लिखा था रूम नंबर _105 ,वेटिंग मिस्टर रॉबिन।
वह उठी ,लेकिन लड़खड़ा रही थी ।उसे लड़खड़ाता देख वेटर ने उसे रूम नंबर _ 105 के दरवाजे तक पहुंचा दिया।
क्रमशः

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