जब कोई इंसान दृढनिश्चय कर चुका हो और साथ ही उस पथ पर अग्रसर भी हो चुका हों तों उसके दृढनिश्चय को हिलाना और उसे उसके पथ से भटकाव की ओर ले जाना निश्चित ही कठिन कार्यों में से एक कार्य हैं । अरण्या जानती थी कि शिविका ने जों एक बार ठान ली वह उसे करके ही मानती है इसलिए इसे समझाना बेकार ही जाने वाला हैं ।
' एक आइडिया है , इससे मुझे पापा को ना भी नहीं बोलनी पड़ेगी और मेरा काम भी दोनों तरफ से होता रहेगा ।' शिविका ने खुशी से चहकते हुए कहा ।
' मैं कुछ समझी नहीं बहन , तुम क्या कहना चाहती हों ?' अरण्या ने आश्चर्य से शिविका को देखकर कहा ।
' बात ऐसी है बहन कि तुम सिर्फ कहती हों कि तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हों , मेरी बहन हों लेकिन मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता ।' शिविका ने मुॅंह बनाते हुए कहा ।
' तुम्हें ऐसा क्यों नहीं लगता , तुम ही बताओ कि ऐसा मैं क्या करूं कि तुम्हें मेरी बातों पर यकीन हों जाएं और तुम मान लो कि हम बेस्ट फ्रेंड और बहनें ही हैं।' अरण्या ने कहा ।
' तुम मेरा एक छोटा सा काम कर दो , मैं मान लूंगी कि तुम मुझे अपना मानती हों ।' शिविका ने अपना असली पत्ता फेंकते हुए कहा ।
' लाॅ की विद्यार्थी इतना तों कर ही सकती है ना अपना काम निकलवाने के लिए ।' शिविका ने मन ही मन में कहा ।
' मैंने यह कभी भी नहीं सोचा था कि मुझे अपनी दोस्ती सिद्ध करनी पड़ेगी लेकिन तुम कहती हो तों यही सही ।' दुःखी स्वर में अरण्या ने कहा ।
' तों सुनो ! मैं चाहती हूॅं कि पापा के बताए पते पर मैं नहीं बल्कि कोई और जाएं और उस लड़के से मेरी जगह वह मिलें । ऐसा करने से पापा की इच्छा भी पूरी हों जाएगी और पापा को कभी मालूम भी नहीं चलेगा कि उस लड़के से मैं मिलने नहीं जा रही हूॅं ।'
शिविका ने कहा ।
' वह लड़की कौन होगी जों तेरी जगह पर उस लड़के से मिलने जाएगी ?' अरण्या ने आश्चर्य के साथ पूछा ।
' तुम और कौन ।' शिविका ने मुस्कराते हुए कहा ।
' मैं ...... नहीं .. नहीं ... मैं यह नहीं कर सकती । अगर अंकल जी को मेरी इस हरकत के बारे में मालूम चल गया , वह तों मुझे जीतें जी मरवा डालेंगे ।' अरण्या ने थूक निगलते हुए कहा ।
' ऐसा कुछ नहीं होगा , मैं ऐसी नौबत आने ही नहीं दूंगी ।' शिविका ने अरण्या के डर को कम करने की कोशिश करते हुए कहा ।
' मुझे माफ़ कर दें बहन लेकिन मैं यह काम नहीं कर पाऊंगी ।' अरण्या ने हाथ जोड़कर कहा ।
' तब भी नहीं जब मैं इस काम को करने के लिए तुम्हें पाॅंच लाख रुपए दूंगी । जानती है ना ! इन पैसों से तुम अपने बचपन से देखते आ रहे डाॅक्टरी के सपने को पूरा कर सकती हों ।' शिविका ने कहा ।
अरण्या बचपन से ही डाॅक्टर बनना चाहती थीं लेकिन पैसों की कमी के कारण वह अपने सपने को साकार नहीं कर पा रही थी ।
' बोलों अरण्या ! तुम मेरा काम करोगी ?' शिविका ने अरण्या को झकझोरते हुए कहा ।
एक तरफ अरण्या के बचपन से देखें सपने थे तों दूसरी तरफ अंकल जी का डर साथ ही शिविका जैसी पैसों के घमंड में बिगड़ैल लड़की जिसे बचपन से उसने अपना बेस्ट फ्रेंड दिल से माना था । वह शिविका से अपनी दोस्ती कतई नहीं तोड़ना चाहती थी ।
' मैं तुम्हारा काम करने के लिए तैयार हूॅं लेकिन ध्यान रहे अंकल जी को इसका पता नहीं चलना चाहिए ।' अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा ।
' पापा जी को बिल्कुल भी मालूम नहीं चलेगा कि मैं नहीं बल्कि तुम उस लड़के से मिलने जा रही हों ।' शिविका ने कहा ।
' अब मैं चलती हूॅं , मेरी माॅं मेरा इंतजार कर रही होगी तुम मुझे मैसेज कर देना कि मुझे कब , कहाॅं और कितने बजे उस लड़के से मिलने जाना है ?' कहते हुए अरण्या जाने के उठ खड़ी होती हैं ।
' दोस्त हों तों तेरे जैसी ! मेरी खुशी के लिए तुम यह कर लोगी ऐसा मेरा दिल ऐसा बारंबार कह रहा था ।'
शिविका ने अरण्या को गले लगाते हुए कहा ।
' मेरे मन को यह बचपन से जानती है तभी तों हर बार बाज़ी मार लेती है , अपनी बात मुझसे मॅंगवाने में तों इसे महारत हासिल है ।' अरण्या ने मन ही मन में कहा ।
दूसरे दिन शिविका के बताए पते पर जाने के लिए अरण्या चल पड़ती है । एलोरा रेस्टोरेंट के पास पहुॅंच वह ऑटो से उतर ही रही होती हैं कि तभी सामने से आती बाइक एक बुजुर्ग को धक्का मार सर्र से अरण्या के पास से गुजरती है । अरण्या कुछ समझ पाती वह बाइक सवार वहाॅं से रफूचक्कर हों चुका होता है ।
कुछ ही पलों में भीड़ इकट्ठी हों जाती हैं । जहाॅं भीड़ इकट्ठी तों हों गई थी लेकिन सिर्फ और सिर्फ तमाशा देखने के लिए उसी भीड़ को चीरते हुए अरण्या अपने कर्म पथ की राह पर आगे बढ़ने लगती हैं । अभी उसे तनिक भी एहसास नहीं कि वह किस काम के लिए यहाॅं आई थी ? वह उस बुजुर्ग की सेवा में लग जाती है । बुजुर्ग के लिए देवदूत बनकर आई अरण्या उस भीड़ में खड़े एक शख्स के दिल में पहली नजर में ही उतर जाती हैं । इस बात से बेखबर अरण्या अपनी सेवा भाव के प्राथमिक चरण को पार कर रोगीवाहन ( एम्बुलेंस ) को बुलाने के लिए फोन करती हैं और तब तक उस बुजुर्ग के पास बैठी रहती है जब तक कि एम्बुलेंस आ नहीं गई ।
उस बुजुर्ग को एम्बुलेंस में बिठा अरण्या कुछ देर यूं ही खड़ी एम्बुलेंस को जाते हुए देखती रहती है । अनायास ही वह चौंक कर एलोरा रेस्टोरेंट के मेन गेट की तरफ भागती हैं ।
क्रमशः
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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