पंडित रामचरण शास्त्री कस्बे के मशहूर ज्योतिषि थे। चारों तरफ उनकी विद्वत्ता की धाक थी। कुंडली, हस्त रेखा और तो और माथे की रेखा देखकर किसी का भी भविष्य बता देते थे। धन की कोई कमी न थी। सो उन्होंने अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक बहुत सुंदर कन्या से कर दिया। 
पुत्र के विवाह के छह महीने बाद उसके पेट में दर्द हुआ। डाक्टरों को दिखलाया। डाक्टरों ने बङे शहर के डाक्टर के लिये रेफर कर दिया। बङे शहर में भी बच्चे का इलाज शुरू हुआ। कई जांच करायी गयीं। पर विधाता को कुछ और ही मंजूर था। जांचों की रिपोर्ट आने से पूर्व ही बेटा परलोक सिधार गया। 

रोते रोते पुत्रवधू ने एक उलाहना दे दिया - पिताजी। आप सबका भविष्य बता देते हैं। अपने पुत्र का भविष्य नहीं देख पाये। कम से कम मेरी जिंदगी तो खराब होने से बच जाती। 

शास्त्री जी के पास पुत्रवधू के प्रश्न का कोई उत्तर न था।
दिवा शंकर सारस्वत 'प्रशांत'