बहुत बेचैन में थीं ज़िन्दगी हमारी
एक पल को ना चैन थे आती
क्या करे कुछ दिल समझ ना पाया
दुनिया के सितम से जो था मारा
होगयी थीं मौत से भी बत्तर ज़िन्दगी
ना कोई जीने की ख्वाहिश थे बच्ची
सोचा दिल ने एक खतम कर दू खुदको
क्या करें जीके ऐसी ज़िन्दगी
फिर ख्याल आया कुछ अपनों चेहरा
जिसके लिए अब भी है हम जरुरी
समझाया दिल ने एक बार मुझे
कटेगी भी नहीं कुछ ऐसे ज़िन्दगी
जैसे भी हो जीना तो है तुम्हे
लेकिन इसके लिए भी कोई बहाने है जरुरी
एक रोज़ बैठे बैठे मुझे खयाल आया
की थीं कभी दीवानी मैं शायरी की
धड़क कर दिल ने दस्तख दी
मिल गयीं तुम्हे नैना वजह जीने की
दिल पे हाथ रख कर मैं मुस्कुराई
कहाँ चल मान लेती हूँ बात तेरे इस बार भी
उठा ली कलम कागज़ अपनी हाथो में
और कुछ अफसाने लिखने बैठ गयीं
दिल लगा कुछ इस तरह अल्फाज़ो में की
लिखते ही लिखते जाने कब शायरा बन गयीं...!!
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नैना....✍️✍️💕

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