स्वाति की मां स्वाति के गले लगकर - बेटा मैं बहुत खुश हूं , कि तुम्हें रविश जैसा जीवनसाथी मिला है । जिसने तुम्हारे अतीत को जानते हुए भी तुम्हें दिल से अपनाया है । बेटा बस मैं यही चाहती हूं कि तू भी अपने अतीत को भूल कर एक नयी शुरुआत कर । स्वाति से दूर होते हुए स्वाति की मां कहती हैं । रविश की ओर मुड़ कर - बेटा , अगर स्वाति से कोई भूल हो जाय । तो उसे माफ कर देना । उसने पिछले कुछ सालों से बहुत दुःख झेले हैं । तुम्हारा साथ उसे सारे दुखों को भुलाने में मदद करेगा । लेकिन अगर स्वाति कभी डगमगा जाये तो तुम उसका साथ कभी मत छोड़ना ।
रविश - मां , मैं भी आपका बेटा हूं । आपको कभी निराश नहीं करूंगा और रही बात स्वाति की तो परिस्थिति चाहे जैसे भी हो । मैं स्वाति का साथ कभी नहीं छोडूंगा । स्वाति की मां - सदा खुश रहो बेटा तुम ...।
उधर प्रशांत और पीहू , रविश का कमरा सजा रहे थे । लाल गुलाब से सजा कमरा बहुत ही सुन्दर लग रहा था । पीहू - यहां तो सारी सजावट हो गई । अब चलें बहुत देर हो चुकी है सब हमें ढूंढ रहे होंगे । पीहू और प्रशांत दोनों रिसेप्शन में चले जाते हैं । उनके जाते ही सभी घरवाले साथ में खाना खाते हैं । कुछ समय बाद घर के बुजुर्ग वापस आकर अपने - अपने कमरों में जाकर आराम करने चलें जाते हैं । रानी भी सबको गुडनाईट बोलकर अपने कमरें में सोने चली जाती है । पीहू स्वाति को रविश के कमरे में ले जाती हैं । स्वाति , रविश के कमरें की सजावट देखकर बाहर ही खड़ी हो जाती है और कमरें को देखती है ।
पीहू - आपको कमरें की सजावट कैसी लगी दी ! अच्छी है ना ! स्वाति हां में सिर हिलाती है । पीहू , स्वाति को पास के सोफे में बिठाकर स्वाति को समझाती है ।
पीहू - दी , आप इस शादी से खुश तो है ना ! स्वाति , पीहू को देखकर - पता नहीं पीहू कुछ समझ नहीं आ रहा है । मैं अपनी पहली शादी का सच देख चुकी हूं । अभी मैं डरती हूं कि फिर से मेरे साथ वही सब मत हो । लेकिन जब मैं रविश जी को देखती हूं तो अपने आप में एक सूकून महसूस होती है ।

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