पंचतत्व में मिल जाना है
काहे करता मेरा मेरा
ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा ,
सब कुछ छोड़ चले जाना है।
पंचतत्व में मिल जाना है ।।।।।।
पंचतत्व की बनी है काया
पंचतत्व की सारी माया ,
हाथ जोड़ो रब के आगे
चलते चलते ही चले जाना है।
पंचतत्व में मिल जाना है।।।।।।
जीते जी का मान करो
थोड़ा हाथ से दान करो,
छोड़कर एक बार गया जो
वापस मुड़कर नहीं आना है ।
पंचतत्व में मिल जाना है।।।।।।।
खाली हाथ आया रे बंदे
खाली हाथ है तुम्हें जाना,
तिनका बराबर भी रे बंदे
साथ नहीं है ले जाना
जीवन बस मुसाफिरखाना है ।
पंचतत्व में मिल जाना है।।।।।
स्वरचित सीमा कौशल
यमुनानगर हरियाणा

0 टिप्पणियाँ