कजलियां आई ताला के घाट।
नागपंचमी मां बै दैई कजलियां नोनी नोनी हरी पीरी उग गई कजरियां।।
कजलियां बांटे खुशियां औ परेम नोनी फसल को लाबें संदेसा।
मोडिन की कजलियां मोडन की झालर नोनी दीखें हर घर द्बार ।।
ताला मां सिरा दई सबने कजरियां बिन्नू ने खोंट लईं ताला के घाट।
भईया कक्का सब जुरे घाट पे राम राम करके दै दयी कजरियां।।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर

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