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नहीं होती कोई भी अस्तित्व हमारी 
इस दुनिया में न हमारा कोई पहचान होता
ना होपाते कभी रूबरू इस जहाँ से मैं
जो माँ के आँचल में जनम न हुआ होता....!!

किसी को पता होता की क्या क्या है इस जहाँ में
सुख क्या होता है दुःख किसे कहते है
कौन जान पाता इस चाँद सूरज की महत्व भी
जो एक माँ के गर्भ से जनम न हुआ होता...!!

माँ शब्द है तो देखने में सबसे छोटा शब्द
पर इनसे बढ़ा पुरे ब्रह्माण्ड में कोई नहीं है
होते हर शख्स खुद से भी बिलकुल बेखबर
जो माँ के गर्भ से जनम न हुआ होता....!!

माँ की ही लालन पालन की ये असर है हम सब पर
जो एक से एक पहचान पाये है इस जहाँ में है
कहाँ से जूता पाते ये शानोंशौकत इस जहाँ में
जो माँ के आँचल मे गर जनम न हुआ होता....!!

बढ़ते है लोग ज़िन्दगी में कुछ इस तरह बनके अभिमानी
माँ को भी भूल जाया करते है जिसने दी ये जिंदगानी
किससे ये गुमार करते ये लोग किसपे करते ये यारी
जो माँ के आँचल में गर इन्हे जनम न हुआ होता...!!

माँ जननी है हमारी क्यूँ ये दुनिया भूल जाते है
खुद की एक पहचान क्या मिला माँ को ही भूल जाते है
देते है दर्द इतना उनकी ज़िन्दगी में कुछ लोग
जितना दर्द उन्हें जन्म के वक़्त भी न हुआ होगा....!!

धरती के जैसी हर दर्द सहती है माँ
होठों से उफ्फ तक न किया करती है
खुद हज़ार तकलीफ में ही क्यूँ न हो पर
माँ के लिए अपनी बच्चों से बढ़कर कोई नहीं होता...!!

वक़्त जैसी भी हो हिम्मत करके चलना सिखाती है
ज़िन्दगी के राह में दुनिया से कदम मिला कर चलना सिखाती है
लुटाती है प्यार हर किसी पर बेशुमार ज़िन्दगी भर
माँ के दिल ने किसी जे लिए भी कोई भेदभाव नहीं होता...!!
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नैना.....✍️✍️✍️💓