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बहुत दिनों बाद आज दिखे हैं आसमान के तारे
सजी हैं खूबसूरती से आसमान जो टीमटीमा रहे हैं तारे

बहुत दिनों बाद निकला हैं कोई अपनी छत पे
बहुत दिनों बाद रात में निकली हूँ मैं अपनी आँगन में

इतने दिनों से सजी नहीं थीं ये महफिल तारो की
क्यूँ की रुक नहीं रही बौछार सावन की बरसाते

बहुत दिनों बाद छायी हैं फिज़ाओ में मदहोशी सी
खिल रही हैं कली कली चाहत के गुलिस्ता में

बहुत दिनों बाद यह अहसास फिर टकराया हैं दिल से
जैसे इन हवाओ ने किसी की दिल के पैगाम लायी हैं

बहुत दिनों बाद नैना आँखों से नींद उड़ी हुई हैं
लगता हैं कोई हैं जो जाग रहा हैं अभीतक मेरी याद में
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नैना....✍️✍️