दरवाजे के बाहर आवाज आई ----"मैं !"
अब आगे_____

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दरवाजा खोलकर झांका तो श्रेय खड़े थे ।
उनको देखकर ग्रेसी बोली," --- आ गए आप भी ... इंटरव्यू कैसा रहा ? चलो समय पर पहुंच गए आप... गिट्टू भी आ गई है ..!"

श्रेय बोले---" ओ चलो बहुत अच्छा है गिट्टू आई है ..नैनी मजा कर रही होगी !  .. कुछ रुके फिर बोले । --"ओ .. नहीं.. ग्रेसी आज भी नहीं ..तुम्हें पता है ऑफिस में डिपार्टमेंटल छंटनी हुई थी, हम जैसों बंदे निकाले गए  ..मैनेजमेंट के चमचे जो दुम हिलाते थे आगे पीछे वही टिके ... हम ही बाहर. .!"

ग्रेसी --" कोई ऐसे कैसे कर सकता है श्रेय ? अभी तो तुम्हारी नौकरी को पूरे बीस साल थे .. इंजीनियरिंग भी की तुमने.. और तो और कंपटीटिव एक्जाम भी पास किया ..उसके बाद भी ..??"

श्रेय बोला--" और सुनो ग्रेसी पता है जो फ्रेशर्स (नए जॉब वाले बच्चे)हैं ,कितने परांगत हैं बहुत ज्यादा डिग्री लिए हैं और तो और इतनी बेरोजगारी के बीच वह बीस से पच्चीस हजार की जॉब करने को तैयार हैं... ! उनको केवल अनुभव चाहिए बस .!"

ग्रेसी--"कोई बात नहीं हनी ! मैं भी कहीं ना कहीं  जॉब की कोशिश करूंगी ..और तुम भी ...! और हां सुनो..जी आपने दो महीने की फीस जमा नहीं करी क्या? ...नैना के स्कूल से फीस का नोटिस आया है जरा पढ़ लीजिए ..देखो सोचो क्या हो सकता है आगे ..??"परेशान  ग्रेसी के माथे पर शिकन की अनचाही लकीरें आ गई ।

"ओ ...नो ..! मैं थोड़ा काम में परेशान चल रहा था "श्रेय ने एक सांस में पूरा नोटिस पढ़ लिया था ।

लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था ,आगे कुछ सूझ नहीं रहा था अंधेरा ही था घुप्प अंधेरा ।

उधर गिट्टू जब किचन की तरफ हॉल में जब आ रही थी श्रेय और ग्रेसी के वार्तालाप को सुन रही थी परंतु ,किसी के परिवार में हतक्षेप भी नहीं कर सकती थी ..!

भोजन का समय ---

उधर ग्रेसी ने सबको आवाज लगाई :
"गिट्टू और नैना आओ डिनर के लिए ।"

श्रेय ग्रेसी की मदद कर रहे थे । 

गिट्टू ग्रेसी के चेहरे के भाव को जानती थी क्योंकि ,ग्रेसी किसी से मदद नहीं ले सकती थी, यह बात उसे बचपन से पता थी । फिर भी उसने युक्ती लगाई और खाने के बाद उसे छत में बहाने से बुलाया ।

रात के दस बजे ---
नैना गिट्टू के साथ कहानियां सुन रही तभी 
उसने नैना से कहा ---"डॉल मैं अभी आ रही हूं तब तक तुम स्टोरी सुनो ..!"
नैना---"जी मासी !"

फिर....

गिट्टू ने कमरे के बाहर ग्रेसी को बुलाया...!
गिट्टू बोली--"दी ..जरा इधर आना!" और हाथ में रखा एक पैकेट ग्रेसी को थमा दिया ।

ग्रेसी को अजीब लगा बोली--" ए ...लड़की क्या है इसमें ?"

मुस्कुराते हुए गिट्टू बोली ---" तुम्हें पता है पिछले हफ्ते मुझे नया कंट्रेक्ट मिला था और मैंने साइन किए थे तुमको पहले ही मैं बोल चुकी थी कि तुमको कुछ दूंगी । हैं ना?वहीं है..!"

ग्रेसी को लगा जैसा किसी ने शरीर में करेंट डाल दिया हो । पीछे हटते हुए बोली---"नहीं नहीं गिट्टू तुम मुझसे छोटी हो ..तुमसे कभी नहीं ..ले सकती हूं ..!"

गिट्टू --" नहीं दी ,अभी मुझे जरूरत नहीं मेरी शादी भी नहीं हुई...तुम नैना के लिए सम्भाल कर रखो । काम आएगें ..!"

ग्रेसी जिद कर रही थी लेकिन ,गिट्टू सून नहीं रही थी ।  नैना खोजती हुई वहां पहुंच  गई..!

आवाज लगाई,--" मांसी चलो ना सोने ..कल आउटिंग भी करनी है ।एक और सरप्राइज ममा के लिए ।"

गिट्टू बोली ,--"आ रही हूं बेटा चलो तुम !"ग्रेसी की तरफ मुंह करके बोली चलो कल संडे है दी बाहर चलें चौपाटी जूहू बीच ! कल का सरप्राइज था...नैना ने .. !" और हंसने लगी ।

ग्रेसी मुस्कराई बोली,---"पता नहीं मौसी और बेटी के अंदर कौन सी खिचड़ी पकती रहती है ...तुम भी ना !! और इसकी क्या जरूरत थी ..गिट्टू तुम मदद भी करती हो और वो भी बहाने से ..तुम्हें मालूम हैं तुम्हारे जीजू की नौकरी जाती रही ..बहन अपने लिए भी कुछ पूंजी जोड़ कर रखो...लग्न का वक्त तो तुम्हारा ही है .!" 

गिट्टू सकुचाई बोली,----" दी देखा जाएगा ..फिलहाल ..तुम मेरी सुनो ..! इसे रखो ठीक है..!"

कभी सोचा भी ना था ग्रेसी ने छोटी बहन इतनी बदल जाएगी । कभी बचपन में तो बोलना उसी ने सिखाया था उसे..और इतनी समझदार हो जाएगी मालूम ना था ..इसी को वक्त कहते हैं शायद ...! 

ग्रेसी कमरे की ओर मुड़ गई और गिट्टू नैना के साथ सोने चली गई ..! यह बात नहीं थी कि ,नैना की फीस भर जाएगी ..बात छोटी थी पर स्वाभीमान बड़ा .! 

आंखें बोझिल हो रहीं थीं पर ग्रेसी की नींद कोसो दूर ..! उसने करवट ली और गिट्टू के अहसान भारी पड़ते जा रहे थे और वो छोटे होते जा रहे थे । 

उधर नैना के पास गिट्टू पहुंची और बोली " क्यों डॉल सोई नहीं अब तक ...चलो जल्दी सो जाओ । जाना है ना सुबह?"

नैना के सर को हाथ से सहला कर गिट्टू बोली ..!

नैना --" जी मासी ..बस एक स्टोरी सुना दो बस एक प्लीज मासी ..!"

गिट्टू कहानी सुनाने लगी --" एक थी प्यारी राजकुमारी ......राजा की इकलौती बेटी ..ब्यूटिफुल जब हंसती तो फूल झड़ते और रोती तो मोती ..........!!"

वह सुना ही रही थी कि , नैना उसके हाथों के बने तकिए में गहरी नींद में सो गई । वह उसके नन्हें मासूमियत से चेहरे को निहार रही थी । जिसमें अनगिनत सपने तो थे और कितने सच होंगें यह वक्त ही जान सकता था ..! वह भी  सो गई ..।

सुबह ....

दिन इतवार....
दरवाजे पर दस्तक ---
थप_ थप और नैना और गिट्टू बिस्तर पर पड़े अलसा रहे थे ‌ ।

"आ रही हूं दी" ...गिट्टू बोली । उसने देखा, ग्रेसी हाथ में चाय की ट्रे लेकर खड़ी थी ..! 

ग्रेसी बोली__" गिट्टू यह ..शुगर ,टी बैग्स और गर्म पानी और दूध ..अपने हिसाब से चाय बना लेना ..।"

गिट्टूी बोली --"  No need to  have a formal Di ,take it easy ok..!"(कोई औपचारिकता की जरूरत नहीं आराम से ..! )

और खिड़कियों से पर्दों को हटाया, बाहर का रोमांचित दृश्य किरणें फर्श पर पड़ी थीं...उसने खिड़की खोली ..ताजी हवाओं का झौंका अंदर की ओर आया .. दोनों हाथों को फैलाया आंखें बंद कीं ,बोली --" हाऊ रोमेंटिक इट इज ..!"(कितना रोमांचक है यह ) 

फिर जाकर नैना को जगाने लगी ..!

"डॉल उठो बेटा बाहर देखो कितना सुंदर लग रहा है ..!" गिट्टू जानती थी कि,बच्चों को जगाना । 

सारी तैयारियां शुरू हो गई आउटिंग के लिए पूरा परिवार तैयार था एक रोमांचक वक्त आने वाला था .....!

गिट्टू ने गाड़ी स्टार्ट की ---

सब बारी बारी से बैठ गए ---

गिट्टू खुश थी वहां ले जाना चाहती थी वह ग्रेसी को जहां वह व्यस्तता के कारण नहीं जा पाती थी ..!

गाड़ी गिट्टू चला रही थी और नैना के अंदर एक और गिट्टू झांक रही थी .. बिल्कुल उसकी तरह ..। 

गाड़ी रूकी ...सब उतरे और चल पड़े
समुद्र के किनारे ..!

नीला समुद्र ..गिट्टू नैना का हाथ थामें थी । श्रेय और ग्रेसी पीछे चल रहे थे ।

गिट्टू बोली ,"---मुझे आपको अपनी युनिट से मिलवाना भी है ...बाद में .. तैयार हैं सब ..!"

नैना खुश थी ..! आखिर मौसी का संसार कौन सा था उसे देखना चाहती थी ..वह भी ..!!


सुनंदा ☺️

क्रमशः

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