जन्म लिए हैं श्रीकृष्ण हो श्यामा रोहिणी नक्षत्र में।
घोर बारिश में आये हैं श्यामा कंस के जेल में।

देवकी  कंस की प्यारी बहना,
पिया घर छोड़ने ले जाता कंसा,
सुन लिया आकाशवाणी हो श्यामा,
 उस ने मार्ग में।

नेह दिखाते हो जिस बहना पर,
 आएगी उसके ही कारण आफत,
आठवां पुत्र होगा काल हो श्यामा,
तेरे जीवन में।

आकाशवाणी सुन कंस घबराया,
पति पत्नी को कारागार में डाला,
मोही बन गया निर्मोही हो श्यामा,
जीवन के लोभ में।

भादो महीना तिथि है अष्टमी,
काली अंधियारी रात है कितनी,
माया जाल फैलाये हो श्यामा,
पहरू सो गए  नींद में।

बारह बजे अवतरित हुए हैं,
वासुदेव जी चिंतित हुए हैं,
सूप में रखकर लाल हो श्यामा,
आये यमुना पार गोकुल में।

नंद को सौंपकर जिगर का टुकड़ा,
बार बार देखें लाल का मुखड़ा,
बुझे मन से चल दिये हो श्यामा,
नियति को भुगतने।
पुत्र को सौंप के।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'