बेटियों के सुविधा के लिए,
दिया जाता है ये,जो कहलाता दहेज ये।
लड़के वालों ने दहेज पर अपना हक जमाया,
मुंह मांगे दामों पर अपने आप को बिकवाया,
बाजार में अलग अलग दूल्हों के अलग अलग दाम है।
वाह री दुनिया दूल्हों की भी अपनी अलग पहचान है।
जब तक ये अभिशाप रहेगा, तब तक दूल्हा बिकता बेहिसाब रहेगा।
बंद करों ये दहेज लेना और देना,कुछ तो सोचो,
दहेज लेना और देना पाप होगा तू भी किसी दिन किसी बेटी का बाप होगा।
अपनी सोच को बदलो, दुल्हन ही दहेज है।
 इस बात को समझो और इसे अपनाओ,
दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करों,
समाज में हो रही भ्रूणहत्या को रोको,
बेटियों को अपनाओ और उन्हें पढ़ाओ।
हरप्रीत कौर
दिल्ली