एक सूत्र जो दो दिलों को प्रेम के डोर से बांधता है ,चाहे रिश्ता खून का हो ,या अजनबी ।

यही हमारी संस्कृति यही हमारी परंपरा है।
बात उन दिनों की है ,जब अंग्रेज हमारे देश की हुकूमत पर काबिज थे।भारत माता दर्द से कराह रही थी ,ऐसे में कुछ वीर सपूतों ने अंग्रेजों के जुल्मों सितम के आगे बगावत का रास्ता अख्तियार किया।
उनमें सबसे ज्यादा ,भगत सिंह,राजगुरु ,चंद्रशेखर आजाद का नाम अग्रणी है।

एक बार की बात है ,अंगेजों से बचते बचाते एक तूफानी रात में आजाद एक घर का दरवाजा खटखटाते हैं।
दरवाजा एक महिला ने खोला ,एक मजबूत कद काठी वाले नवयुवक को देख  वह घबरा गई , आजाद ने दरवाजा बंद करते उसे अपना परिचय बताया।
वह महिला बहुत खुश हो गई ।उसने आजाद के लिए खाना बनाया ,बातों बातों में पता चला कि उसके पति बहुत पहले गुजर गए थे ,वह अपनी बेटी के साथ इस घर में रहती है।
बेटी को शादी की उम्र हो चुकी है ,लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह बेटी की शादी नहीं कर पा रही।
आजाद ने कहा _ बहन मेरे ऊपर अंग्रेजों ने 5000का इनाम रखा है ,तुम उन्हें मेरा पता बता दो ,और इनाम बीकी राशि से बेटी की शादी कर देना।

वह महिला बोली _भैया तुमलोग अपनी जान हथेली पर लिए देश की बहू बेटियों की रक्षा हेतु अंग्रेजों से लोहा ले रहे हो , मैं अपनी तुच्छ कामना के लिए एक वीर को उन जालिमों के हवाले कर दूं, मैं इतनी स्वार्थी नहीं।

उसने एक रक्षा सूत्र आजाद की कलाई पर बांधी और 
देश सेवा का वचन लिया।
सुबह हुई,सब जागे ,स्त्री ने देखा आजाद नहीं हैं,और उसके सिरहाने 5000 रुपए और एक पर्ची रखी थी।
महिला ने पर्ची उठाई उसमें लिखा था_मेरी प्यारी बहन  हेतु एक छोटी भेंट।
वह स्तब्ध रह गई ,बहन के लिए आजाद ने अपना कर्तव्य निभा दिया ।