रूप सौंदर्य  के अलावा पढ़ाई  में भी  स्नेहा का कोई मुकाबला नहीं था,लड़के उससे दोस्ती के लिए लालायित रहते।और लड़कियां उसके नोट्स के लिए  आगे पीछे घूमा करती थीं।

सलिल भी उसके ही कॉलेज में पढ़ता था। गांव में बाढ़ के कारण फसल नष्ट हो गई थी,स्नेहा के बाबा उसके लिए फीस नहीं  भेज पाए,बार बार प्रिंसिपल उसे अपने रूम में फीस के लिए बुला रहीं थी,जिससे स्नेहा बहुत परेशान थी।

सलिल को जब पता चला तो उसने फीस जमा कर दी।
तुमने मेरी फीस क्यों जमा की? _स्नेहा ने सलिल से कहा,।
अरे मैंने अभी जमा कर दिया ,जब तुम्हारे पास पैसे  होंगे तो वापस कर देना,अभी एक कप चाय पिला दो ,शुक्रिया करने के लिए _सलिल ने हंसते हुए कहा।
धीरे धीरे दोनो अच्छे दोस्त बन गए।

अब मुझे कोई पार्ट टाइम काम ढूंढना पड़ेगा ,अब बाबा पर बोझ नहीं बन सकती__ कॉलेज कैंटीन  में बैठे  दोनों जोड़े एक दूसरे के आंखों में आंखें डाल निहार रहे थे तभी स्नेहा ने चुप्पी तोड़ी।
सलिल ने कहा _ ओ ,मेरी स्वीटहार्ट तुम्हें नौकरी की क्या जरूरत?
स्नेहा ने कहा _नहीं सलिल ,मैं अब अपना खर्च खुद कमा कर निकालना चाहती हूं।

अच्छा बाबा _मैं तुम्हारी नौकरी के बारे में डैडी से बात करूंगा।

दूसरे दिन ही 
स्नेहा मैं तुम्हारे लिए गुड न्यूज लाया हूं।तुम्हें मेरे होटल सी रॉक में रिसेप्सनिस्ट की नौकरी मिल गई ,पार्ट टाइम जॉब चाहिए थी ना, 5 बजे शाम से 12 बजे तक की है और सैलरी भी अच्छी मिलेगी ।_सलिल ने कहा।

ओह सलिल, तुमने मेरी सारी समस्या दूर कर दी,कहते हुए स्नेहा उसके गले लग गई।

सुनो स्नेहा ,  मैने डैडी से अपनी और तुम्हारी शादी की  बात की है।
अगले साल हमारा एमबीए फाइनल होते ही ,वो हमारी शादी करा देंगे_सलिल ने स्नेहा के हाथों को  चूमते हुए कहा।
दोनों का प्यार दिन पर दिन गहरा होता जा रहा था , स्नेहा जॉब और पढ़ाई में समन्वय बैठाए हुए थी।

स्नेहा ने अपने  बाबा को सलिल से मिला दिया था ,और सलिल ने अपने डैडी से।

स्नेहा को डर था ,कहीं उसकी गरीबी उसके प्यार और शादी के बीच न आ जाए,लेकिन उसने देखा कि सलिल का परिवार बहुत जहीन था,उसके मम्मी ,पापा,भैया भाभी और भाभी की छोटी बेटी पलक सब उससे  घुल मिल गए थे।वीकेंड में सलिल के घर उसका जाना जरूरी था ,वरना पलक बहुत शिकायत करती।

एमबीए खत्म होने से पहले उसकी प्लेसमेंट  बहुत अच्छी कंपनी में हो गई ,उसने होटल वाला काम छोड़ दिया।अब इंटर्नशिप और पढ़ाई इसमें सारा समय निकल जाता था।
सलिल से मिलना उसके घर जाना कम हो गया था।

एमबीए होने के बाद स्नेहा ने जॉब ज्वाइन कर ली। स्नेहा को कंपनी ने एक फ्लैट दे दिया ,उसने बाबा को गांव से बुला लिया।
उसके बाबा बहुत खुश थे ,उन्हें  स्नेहा में ही अपना बेटा दिखता। 

एक दिन सलिल आया और उसने स्नेहा से कहा , डैडी और घर के सब लोग कल तुम्हारे घर आ रहे।
पर क्यों_स्नेहा ने कहा।
शादी की बात पक्की करने को।
अब तो मेरे दिल की रानी अब घर की रानी बनने का समय आ गया _सलिल ने उसे छेड़ते हुए कहा।
स्नेहा शरमा  गई ,उसके गोरे गालों पर लालिमा छा गई।

दोनों की शादी बड़े सादे ढंग से हुई,बहुत गिने चुने वीआईपी लोग ही विवाह में शामिल हुए,मंत्री,बिजनेस टायकून जैसे लोग थे।

सलिल ने भी अपना फैमिली बिजनेस संभाल लिया था।अब उसके पास स्नेहा के लिए वक्त कम रहता।
शादी के बाद ही उसकी नौकरी छुड़ा दी गई।स्नेहा ने विरोध भी किया लेकिन बड़े घर की बहु नौकरी करे ,ये उनके दंभ को चोट पहुंचाती थी।ससुर ने साफ साफ कह दिया हमारे घर की बहुएं ,नौकरी नहीं करतीं। 

स्नेहा ने परिस्थिति के साथ समझौता कर लिया।
घर में कोई विशेष काम तो होता नहीं था,सारे काम नौकर ही  करते थे। पार्टी ,ब्यूटी पार्लर, योगा क्लासेज ,यहीं घर की महिलाओं का रूटीन था।घर में अक्सर सास,और उसकी जेठानी पार्टियां करती ,उसे भी बुलाया जाता तो वह मना कर देती। वह ज्यादातर पलक के साथ ही रहती।
उसे पार्टियों , किट्टी पार्टी का कोई शौक नहीं था।
अब वो एक पिंजरे में कैद थी, जब वो उड़ना चाहती थी ,उसके पंख कतर दिए गए ,वो खुद को  सलिल के प्यार  की बारिश में  भिगोना चाहती थी ,लेकिन सलिल रात को कब आता ,कब सो जाता उसे पता भी नही चलता।


क्रमशः