हमारा तिरंगा कपङे का टुकडा नहीं, जज्बात है;
हम हिन्दुस्तानियों के दिल में जलता हुआ आफताब है।
हम इसकी शान में जीते और मरते हैं ;
इसकी इबारतें लिखते हैं;
फक्र से सीना चौङा करते हैं।
माटी की सोंधी खुशबू समेटे
हमारे रूह का माहताब है;
यह तिरंगा महज कपङे का टुकडा नहीं, जज्बात है।
हिन्दी,ऊर्दू,फारसी,पंजाबी,बांगला न जाने कितनी बोलियों को समेटे
समय के विराट पथ पर अपनी शौर्य गाथा कहता हर हिंदुस्तानी का अभिमान है।
यह तिरंगा बलिदानों को समेटे भव्य गौरव का इतिहास है।
महज कपङे पर रंग और लकीरें नहीं,
जीने की ललक;उत्सर्ग का पैगाम है;
हमारा तिरंगा हमारा अभिमान है।
✍"डॉ पल्लवी कुमारी"पाम "

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