परिचय :साइंस फिक्सन कहानी लेखन की एक विशेष विधा है। यद्यपि साइंस फिक्सन कहानियों का वर्तमान विज्ञान के सिद्धांतों से बहुत संबंध नहीं होता है। पर एक आश्चर्य की बात है कि अनेकों साइंस फिक्सन कहानियाँ अनेकों वैज्ञानिक खोजों का आधार बनी हैं। रोबोट, अंतरिक्ष उपग्रह तथा आर्टिफिशल इंटेलीजेंसी जैसी वैज्ञानिक खोजें ऐसी ही साइंस फिक्सन कहानियों का परिणाम हैं।
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अंतरिक्ष वैज्ञानिक आज कल ज्यादा खिन्न हो रहे थे। विज्ञान की उन्नति के साथ ही बहुत बदलाव हो चुका था। कभी मानव निर्मित उपग्रहों का परिचालन देखकर दुनिया की भलाई करने बाले वैज्ञानिक अब उपग्रहों को नियंत्रित कर दूसरे देशों पर हमला करने व उपग्रही हमलों को रोकने में व्यस्त थे। नवीन तकनीक से प्रक्षेपित उपग्रह न केवल दूसरे उपग्रहों को नष्ट करने में सक्षम थे बल्कि दूसरे देशों की जमीन पर अचूक मिसाइल फेंकने में भी दक्ष थे।युद्ध इंसानों के बजाय मशीनों पर ज्यादा निर्भर थे।
नासा की प्रयोगशाला में नीरव, जूली, अलवर्ट उपग्रहों की निगरानी कर रहे थे। नीरव को विज्ञान का बहुत शौक था। इसी शौक में पहले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र में वैज्ञानिक हुआ। जल्द ही उसकी काबलियत की खबरें अमेरिका तक पहुंच गयीं। नीरव को नासा से अच्छा पैकेज मिला। आज नासा के अति महत्व के उपग्रह केंद्र की देखरेख उसके हवाले थी।
जूली घुंघराले बालों बाली, एक दम गोरी, अमेरिकन लङकी, बहुत काबिल वैज्ञानिक है। अलवर्ट भी एक अमेरिकी वैज्ञानिक है। दोनों नीरव को बहुत मान देते हैं। पिछले चार साल में नीरव ने सभी का दिल जीत लिया है।
अभी तक तो ठीक था। पर जब से उपग्रहों का हथियार की तरह प्रयोग होने लगा, वैज्ञानिकों को अपनी नौकरी सैनिकों जैसी लगने लगी। कब किस देश का उपग्रह ज्यादा निगरानी कर रहा है, उसकी हरकत कैसी हैं, जरूरत होने पर उस उपग्रह को नष्ट कर देना, अब वैज्ञानिकों की नौकरी का अंग बन चुका था। ऐसा नहीं है कि यह तकनीक केवल अमेरिका के पास थी। चीन, रूस जैसे देश भी इस तकनीक से दक्ष थे। अक्सर धरती से ज्यादा आसमान में लङाइयां होती थीं। वैज्ञानिकों पर उपग्रहों से दूसरे देशों की खुफिया जानकारी लेना तथा दूसरे देशों के खुफिया उपग्रहों को नष्ट करने का बङा दवाव था।
" क्या थक गये नीरव...।" जूली बहुत पास बैठ गयी। " चलो तुम्हारे लिये मशालेदार इंडियन चाय बनाती हूं।"
"मेरे लिये भी बना लाना जूली..। ठीक है नीरव को पसंद करती हो, पर इंडियन चाय तो मुझे भी पसंद है।" अलवर्ट कुछ और बोलता, उससे पहले जूली ने उसकी पीठ पर प्यार से एक घूंसा रख दिया। वैसे अलवर्ट और जूली बचपन के मित्र थे। हर बात के राजगार।
नीरव को देख जूली उसे दिल दे बैठी थी। इसका पता भी सबसे पहले अलवर्ट को चला था। शायद नीरव भी जूली को चाहने लगा था। पर अजीब बात थी कि दोनों चुप थे। बीच बीच में अलवर्ट दोनों को अहसास कराता रहता कि वे एक दूसरे के लिये बने हैं। इसी तरह मजाक मजाक में... ।
आज जब जूली ने अलवर्ट पर घूंसा मारा तो नीरव भी हॅस बैठा।
" तुम्हें मेरी बातों पर हॅसना नहीं चाहिये, मिस्टर नीरव। आई एम सीरियस... ।"
अलवर्ट अपने काम में लग गया। नीरव भी उसकी बातों की विवेचना करने लगा। क्या दो अलग अलग देशों में पैदा हुए, अलग अलग विचार धारा के लोगों में प्रेम हो सकता है। नीरव याद कर रहा था कि चार साल पहले और आज की जूली में बहुत अंतर है। जहाॅ पहले वह अमेरिकन परिधान पहनती थी, अब अक्सर जूली भारतीय सलवार सूट पहनती है। अक्सर भारतीय भोजन करती है। आखिर इस बदलाव की बजह क्या है। ड्यूटी भी मेरी ही शिफ्ट में लगवाती है। सही समय पर चाय बनाकर पेश करना भी उसका रोज का काम है।
नीरव उठकर किचन के पास पहुंचा। गुलाबी सूट में जूली आज ज्यादा ही खूबसूरत दिख रही थी।
" इज एनी प्रोबलम..। कुछ बात हो तो कह सकते हो, नीरव।"
नीरव कहना तो चाह रहा था कि "जूली मैं भी तुम्हें प्रेम करने लगा हूं। तुम्हें अपने जीवन में लाना चाहता हूं। " पर दिल की बात जबान पर आने से रह गयी।
" हाॅ जूली...। सोच रहा था कि विज्ञान का कितना विकास होना चाहिये। "
" मतलब.. ।"जूली चाय छानकर तीन कपों में कर रही थी।
" जूली...। नहीं, यह विज्ञान नहीं है। आज विश्व विज्ञान के कारण विनाश के द्वार पर खङा है। कभी भी दुनिया खत्म हो सकती है। धरती पर इंसानों की लङाई को पीछे छोड़ हम रोबोट से युद्ध करने लगे। अब उपग्रहों से युद्ध हो रहा है। पता नहीं कोई और भी विनाशक तकनीक आ जाये।"
" हूं.... ।" एक चाय का कप नीरव को पकङा कर जूली अलवर्ट को देने आगे बढ ली।
" पता है जूली..। पहले भी विज्ञान बहुत उन्नत थी। हमारी पुस्तकों में पुष्पक विमान का जिक्र है। पहले इसे कल्पना कहते थे। पर जब इंसानों ने एरोप्लेन बना लिये तब बात को सही कहने लगे। इसी तरह अगस्त मुनि भी घङे से हुए बताये जाते हैं, टैस्ट ट्यूब बैबी की तरह।"
" और क्लोन भी बने थे शायद.. । हनुमान जी के पसीने से पुत्र हुआ था... ।पढा है मेने भी। " अलवर्ट कब मजाक करता है और कब सीरियस होता है, कह नहीं सकते।
" चिंता की बात है कि पहले बङे से बङे हथियार बङी सूक्ष्म तरीके से छिपाये जाते थे। कभी भी हथियारों को लेकर नहीं चलते थे। बस जब जरूरत हुई, हथियार हाजिर.. । शायद कभी ऐसे युद्धों में जीवन और विज्ञान दोनों मिट गया था।"
जूली चुप सुन रही थी। चाय के घूंट पीते पीते अचानक जूली उठी। नीरव के सामने जमीन पर बैठ गयी।
" इंसानियत को बचाने की तुम्हारी चिंता समझ सकती हूं। मुझपर विश्वास करो। चाहे आपका जीवन संवारना हो या दुनिया की हिफाजत करनी हो, आपका साथ दूंगी। कभी भी पीछे नहीं हटूंगी।"
अलवर्ट ने दूसरी तरफ मुंह फेर लिया। नीरव और जूली को लगा कि प्रेम के इस अवसर पर अलवर्ट दूसरी तरफ देख रहा है। पर अलवर्ट अपनी अश्रु विंदुओं को पोंछ रहा था। अपने बचपन के प्रेम का त्याग आसान नहीं है। पर जो प्रेम करता है, वह त्याग करता ही है।
" अच्छा.. । बात इंसानियत को बचाने की है। इसमें तो मैं भी पीछे नहीं हटूंगा।" अलवर्ट बस इतना बोल पाया। बोलना तो बहुत चाहता था। " जूली...। कभी तुम्हारे लिये जान देने का अवसर आयेगा तो अलवर्ट ही जान देगा। तुम और नीरव... हमेशा दुनिया में खुश रहोंगें। प्रेम की कहानियों का हिस्सा बनोंगें। "
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नीरव और जूली की सगाई हो गयी। पर शादी टालनी पङी ।वास्तव में एक बङी आपदा आ गयी थी। जो शायद अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर भारी पङ सकती थी। अमेरिका का एक महत्वपूर्ण उपग्रह तहस नहस हो गया। खास बात यह थी कि सैटेलाइट ने जिन चिन चित्रों को भेजा था, उसमें एक छाया जैसा मानव अनेक औजारों के साथ उपग्रह की तरफ बढ रहा था। सैटेलाइट ने जितनी भी मिसाइल छोङीं, छाया मानव का कुछ भी नहीं बिगाड़ पायीं। छाया मानव ने औजारों से उपग्रह के टुकड़े टुकङे कर दिये। उनका कचरा अंतरिक्ष में ही कहीं घूम रहा होगा।
नीरव और जूली हर चित्र को गहराई से देख रहे थे। किसी भी निष्कर्ष पर पहुच नहीं पा रहे थे। जादूई कहानियों जैसी बात प्रत्यक्ष थी। पर वैज्ञानिक मन किसी जादू टोने पर यकीन न कर वैज्ञानिक कारण व समाधान तलाश रहा था।
धीरे धीरे विश्व के सभी देशों के उपग्रह छाया मानव द्वारा नष्ट कर दिये गये। अब कोई भी खुफिया सैटेलाइट न था। भले ही इससे बहुत नुकसान हुआ पर विगत वर्षों सैटेलाइटों का जिस तरह सामरिक प्रयोग हो रहा था, उस कारण कई लोग खुश भी थे।
पर जल्द ही पूरी दुनिया में अफरातफरी मची हुई थी। आठ, दस छाया मानव आते और सब तहस नहस कर जाते। उनपर गोलियों का भी असर नहीं होता था। इस आपदा से बचने के सारे प्रयास असफल थे। कोई इसे काला जादू कहता, तो कोई कुछ और। विज्ञान की नजर में ऐसा संभव ही नहीं है। पर प्रत्यक्ष को प्रमाण की क्या आवश्यकता है। अमेरिका की मजबूत फौज भी छाया मानवों के प्रकोप से अछूती नहीं थी।
नीरव गहराई से विचार कर रहा था। विज्ञान की किताबों में इसका हल न मिला तो पुराने ग्रंथों को देखने लगा। अक्सर पुरानी बातों को वह वृहत विज्ञान ही मानता था। जहाॅ तक आज भी इंसान नहीं पहुंचा है। जब कोई नयी खोज होती है तब देखा गया है कि उसका उल्लेख भी पहले मिलता है।
दो कथाओं पर नीरव की नजर पङी। शंकराचार्य जी ने परकाया प्रवेश विद्या से राजा के शरीर में प्रवेश किया था। इसी तरह मत्सेंद्र नाथ जी ने दूसरा आभासी शरीर भी बनाकर उस शरीर में प्रवेश किया था। तो क्या यह संभव नहीं कि छाया शरीर बनाकर उसमें जान डाल दी जाये। वैसे विज्ञान अभी तक तो इन बातों पर विश्वास नहीं करता। पर विज्ञान पहले एरोप्लेन के निर्माण पर भी विश्वास नहीं करता था। पुष्पक विमान को कहानी कहता था।
चिंतन और गहराता गया।
" जूली...। तुम्हारी एज कितनी है।"
" इस समय मजाक... ।"
" मजाक नहीं... ।सीरियस बोल रहा हूं।"
" ट्वेंटी फाइव ईयर्स ओल्ड...।"
" फिर पच्चीस सालों में तो शरीर से बदबू आ जानी चाहिये।"
.. जूली को लगने लगा कि नीरव का मानसिक संतुलन खराब हो रहा है। पर नीरव अलग सोच रहा था। आदमी का शरीर पूरे जीवन खराब नहीं होता। पर मरने के बाद चौबीस घंटे भी नहीं होते, बदबू देने लगता है। विज्ञान कहता है कि हृदय गति रुकना ही मृत्यु है। पर हृदय में ऐसा क्या है जो शरीर को बचा कर रखता है। नहीं... विज्ञान अभी बहुत पीछे है। जिस जीव या आत्मा की बात पढी है, वही असल विज्ञान है।
जूली गहराई से सुन रही थी। बात तो ठीक है। लगता है कि विज्ञान की अनूठी कला किसी दुष्ट के हाथों में पङ चुकी है। वह छाया शरीर में जीवों को भेज दुनिया में तबाही ला रहा है। पर कौन है और उन्हें कैसे रोकें, इस पर कुछ समझ नहीं आ रहा।
बचपन में नीरव ने माॅ से सुना था कि जहाॅ विज्ञान खत्म होता है, वहाॅ अध्यात्म शुरू होता है। जूली भले ही क्रिश्चियन थी पर उसकी माॅ भी गिरजाघर में जाती थी। सच बात तो यह है कि ईश्वर एक है और उसके अनेकों रूप हैं। विज्ञान माने या न माने पर नासा के तीन वरिष्ठ वैज्ञानिक नीरव, जूली और अलवर्ट आज अपने अपने आराध्य को याद कर रहे थे। फिर कुछ प्रयोग हुए। शायद कोई चमत्कारिक शक्ति थी कि महान वैज्ञानिक नीरव की बनाई मशीन में दो छाया मानव कैद हो गये। जिनपर गोलियों और उपग्रहों की मिसाइल भी बेकार थीं, आज मशीन में अपनी आजादी के लिये छटपटा रहे थे।
पर छाया मानव कौन हैं, उनका क्या इरादा है, यह पता करना आसान न था। पर महान वैज्ञानिक नीरव के पास इस गुत्थी का हल भी था। अभी तुरंत मरे दो सैनिकों का शव मशीन में डाला और थोङी देर बाद वे जिंदा हो गये। पर ये वो सैनिक न थे। भले ही शरीर उनका था पर अब वे दो छाया मानवों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
दूसरे अपराधियों की तरह उन्होंने भी आसानी से कुछ नहीं बताया पर आर्मी की खास तरकीबें कामयाब हुईं। जब वर्फ की सिल्लियों पर लिटाकर चमङे के डंडों से पिटाई की गयी तो सब सच सामने आ गया।
बहुत पहले लादेन नामक आतंकवादी ने दुनिया खत्म करनी चाही थी। लादेन खुद बङा वैज्ञानिक था। अमेरिका के जहाजों का ही प्रयोग मिसाइल की तरह किया था। ११ सितंबर अमेरिकी इतिहास में अभी भी याद रखा जाता है। अमेरिका ने लादेन का खात्मा किया। पर लादेन के समर्थक किसी न किसी रूप में जिंदा रहे। बगदादी ने भी दुनिया को बहुत तंग किया। अब कुछ वर्षों से आतंकियों का अंत लग रहा था। पर शायद यह तूफ़ान से पहले की शांति थी। अलाहीन अब कहीं अज्ञात स्थन से संगठन चला रहा था। खास बात थी कि उसने कहीं से जीव को निकाल उसे छाया शरीर देने की तरकीब हासिल कर ली। अब रोज अपने सैनिकों को अपनी मशीन में लिटाकर उनकी आत्मा को छाया शरीर देकर दुनिया के अलग अलग हिस्सों में आतंक फैला रहा था।
इस बर्बादी से बचने का एक ही तरीका है। अलाहीन की मौत और उसकी मशीन का अंत। पर इस काम के लिये कोई तैयार न था। नीरव दावा कर रहा था कि वह किसी सैनिक को छाया शरीर दे देगा। ताकि वह अलाहीन के ठिकाने पर जाकर मिशन को अंजाम दे सकें। पर इसमें रिस्क था। कोई कैसे माने कि वह वापस अपना शरीर पा सकेगा।
". जूली...। आई एम सोरी... । दुनिया को बचाना है। मैं खुद मिशन को अंजाम दूंगा। यदि वापस न आ पाऊं तो मेरा इंतजार न देखना। मुझे भूल जाना।" नीरव ने अपना निश्चय सुनाया।
" तुम कैसे जा सकते हों। इस मशीन को आपरेट तो केवल तुम्हीं कर सकते हो। मैं जाऊंगी।" जूली की बात सही थी। जिसे मशीन आपरेट करने का विज्ञान पता है, यदि वही न रुके तो कैसे काम होगा।"
" चल रहने दे..। कभी राइफल चलाई भी है। अनजान जगह पर लङाई भी होगी। देखो मुझे राइफल चलाना आता है। कुछ दिनों आर्मी के साथ विशेष ट्रेनिंग ली थी। इस काम के लिये कोई उपयुक्त है तो बस मैं। नीरव तुम मशीन आपरेट करोंगे। और एक बात और... ।तुम्हारे कान में बोलूंगा।"
अलवर्ट ने सचमुच सैन्य शिक्षा ली थी। नीरव उसकी बात सुनने के लिये पास आया। कई सैन्य अधिकारियों के समक्ष अलवर्ट केवल नीरव से क्या कहने जा रहा था। जो सबसे समक्ष नहीं कह सकता था।
" देखो नीरव..। तुम सच कहते थे कि विज्ञान की एक सीमा है। उससे ज्यादा विज्ञान की उन्नति हमेशा विनाश लाती है। मेरे जाने के बाद बस एक दिन इंतजार देखना। यदि न आऊं तो समझ लेना कि मैं अपना काम पूरा कर शहीद हो चुका हूं। फिर इस मशीन को चुपचाप नष्ट कर देना। आज भले ही इस उन्नत विज्ञान का प्रयोग दुनिया को बचाने के लिये कर रहे हैं, पर कल यह दुनिया को बर्बाद कर सकती है। अपना ध्यान रखना मेरे दोस्त... ।और जूली का भी ध्यान रखना। वह तुम्हें सच्चा प्रेम करती है। "
नीरव और अलवर्ट ऐसे गले मिले जैसे दो दोस्त फिर कभी भी नहीं मिलेंगे। जूली भी पास आ गयी। उसे भी खतरे का अहसास हो रहा था। अलवर्ट से भले ही उसे प्रेम न हो, पर अलवर्ट उसका बचपन का दोस्त है। नीरव और उसका मिलन भी अलवर्ट की बजह से हुआ है।
" जूली...। आई लव यू टू मच..।" जूली को अपने कानों पर भरोसा नहीं हुआ। अलवर्ट मशीन में लेट चुका था। एक दिन बाद भी अलवर्ट छाया शरीर से वापस न आया तो नीरव ने मशीन नष्ट कर दी। नष्ट करते समय भी वह अलवर्ट की सलामती की दुआ कर रहा था। पर अलवर्ट अब इस संसार में ही न था। अनजान जगह पर जैसे ही मशीन से आतंकवादी के शरीर में अलवर्ट उठा तो उसने अलाहीन को गोलियों से भून दिया। मशीन नष्ट कर दी। फिर आतंकियों की गोलियों से मारा गया था।
बिना इजाजत ऐसी चमत्कारिक मशीन नष्ट करने के कारण नीरव को नौकरी से हटा दिया गया। पर नीरव को इसका कोई मलाल नहीं था। जूली ने भी नीरव के साथ नासा की नौकरी छोङ दी। दोनो विवाह कर भारत आ गये जहाॅ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र की अच्छी नौकरी उनका इंतजार कर रहीं थीं। जूली नीरव से सच्चा प्रेम करती है। पर जब भी अपने आराध्य के समक्ष शीश झुकाती है तो आराध्य के साथ अलवर्ट का भी नाम ले लेती है। आखिर अलवर्ट ने जूली और नीरव का प्रेम अमर करने के लिये अपनी जान भी दे दी थी।
यह एक मौलिक कहानी है। जो साइंस फिक्सन कहानी लेखन के अंतर्गत लिखी गयी है। यदि इसका किसी व्यक्ति या घटना से कभी कोई संबंध दिखे तो उसे बस एक संयोग समझना चाहिये।
दिवा शंकर सारस्वत 'प्रशांत'

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