' तेरे लाल सुर्ख जोड़ें की यह झिलमिलाहट , शोख बिंदी की यह जगमगाहट , तेरे चूड़ियों की यह खनखनाहट , तेरे पाजेब का थम - थम कर बजना , भीनी-भीनी सी गजरे की खुशबू , तेरी ऑंखो में बसे कजरे का जादू , तेरा मेरे पास होने का एहसास । मुझे हर रात बेचैन करने लगे हैं । मेरे स्वप्न में भी तुम ही तुम हो अरण्या । दूसरे डेट के लिए हाॅं कर दो अरण्या । मुझे सिर्फ तुम्हारा इंतज़ार हैं । उस दिन का इंतजार है जब तुम और मैं सच्चाई से एक-दूसरे को अवगत कराएंगे । मैं उस दिन का इंतजार करूंगा अरण्या ।' सुजाॅय के अपने आप से कहें गए शब्द उसके मन को और भी बेचैन कर रहें थे ।
' मिस्टर मनोज ! आप तों बहुत जल्दी ठीक हो रहें हैं । लगता है आपको यहाॅं से जाने की जल्दी हैं ।' अरण्या ने कहा ।
' यह सच है कि मैं जल्दी ठीक हो रहा हूॅं और इसमें आप सबकी सेवा भाव का बहुत बड़ा योगदान जों हैं । आप सिस्टर्स और डाॅक्टर साहब की बदौलत ही तो इतनी जल्दी ठीक हो रहा हूॅं और रही बात यहाॅं से जाने की तों वों मैं इसलिए जाना चाहता हूॅं कि मेरे दोस्त की जल्द ही शादी होने वाली है । आप खुद सोचिए सिस्टर ! दोस्त की शादी में उसका जिगरी दोस्त ही अस्पताल में भर्ती रहें तो क्या अच्छा लगता है ? मैं तो अपने दोस्त का शुक्रगुजार हूॅं और सच कहूं तो आज उसकी वजह से ही मैं जिंदा हूॅं । अगर मेरे दोस्त ने पैसों का इंतजाम नहीं किया होता तो इस अस्पताल ने सही समय पर मेरा ऑपरेशन नहीं किया होता और हों सकता है मैं अभी यहाॅं आपसे बात नहीं कर रहा होता बल्कि परलोक में होता ।' मनोज ने हॅंसते हुए कहा ।
' कौन है आपके जिगरी दोस्त मैंने तों आज तक उन्हें नहीं देखा ?' अरण्या ने मनोज की तरफ देखते हुए कहा ।
' जब वह आता हैं उस वक्त आपकी ड्यूटी नहीं रहती है सिस्टर ।' मनोज ने कहा ।
' वैसे आपके दोस्त का नाम क्या है ?' अरण्या ने मुस्कराते हुए मनोज से पूछा ।
' सु ........ मनोज ने जैसे ही नाम लेना चाहा उससे द्वारा बोले गए शब्द जब तक पूरे होते दूसरी सिस्टर ने अरण्या के पास आकर धीरे से कहा :- " अरण्या ! तुम्हें डाॅक्टर कुमार बुला रहें हैं । उन्हें वार्ड नंबर ४ के पेशेंट्स की पूरी डिटेल जाननी है । तुम जल्दी जाओ , यहाॅं पर मैं संभाल लूंगी ।"
अरण्या को जाते देखकर मनोज वहां पर आनेवाली सिस्टर से उसके आने और अरण्या के जाने का कारण पूछता है जिसे सिस्टर बता देती है ।
शिविका चाहती है कि अरण्या दूसरी डेट पर जाने के लिए तैयार हो जाएं इसलिए वह अरण्या को समझाने का एक और प्रयास करने के लिए उसके अस्पताल आती है ।
' तुम आज यहाॅं ?' शिविका को अपने सामने खड़ा देखकर अरण्या के मुॅंह से अनायास ही यह शब्द निकल पड़े ।
' क्यों ! मैं अपनी बेस्ट फ्रेंड से मिलने नहीं आ सकती ?' शिविका ने कहा ।
' आज से पहले तक तों नहीं आई थी फिर आज ऐसा क्यों ?' अरण्या ने कहा ।
' अभी तक नाराज़ हो यार ! चलों , कहीं पर बैठ कर बातें करते हैं ।' शिविका ने कहा ।
दोनों अस्पताल के पास वाले रेस्टोरेंट में जाते हैं ।
' अरण्या ! मुझे लगता है तुम्हें दूसरी डेट पर जाना चाहिए और एक बार और कोशिश करनी चाहिए कि वह लड़का इस शादी से इंकार कर दें । उसकी इंकार ही मेरी आजादी का कारण बनेंगी और साथ ही तेरे सपनों को साकार करने की वजह । जिस दिन वह इस शादी के लिए इंकार कर देगा उस दिन ही मैं तुम्हें पाॅंच लाख रुपए दें दूंगी और तुम्हें तों मालूम है कि इन पैसों की तुम्हें कितनी जरूरत है ? तुम्हें स्काॅलरशिप तों मिल चुकी है लेकिन विदेश जाकर डाॅक्टरी की पढ़ाई करने के लिए सिर्फ स्काॅलरशिप की ही जरूरत नहीं पड़ती है । उस स्कालरशिप को लेकर तुम क्या करोगी जब तुम्हारे पास वहाॅं जाने के लिए पैसे ही ना हों । वहाॅं पहुॅंचने के लिए तुम्हें पैसे चाहिए जो सिर्फ मैं ही तुम्हें दें सकती हूॅं क्योंकि इस अस्पताल में नौकरी कर तुम वहाॅं कभी नहीं जा सकती ।' शिविका ने अरण्या को समझाते हुए कहा ।
' तुमने सच कहा शिबू , मुझ गरीब को स्कालरशिप तों मिल गई लेकिन वहाॅं जाने के लिए पैसे का इंतजाम मैं इस अस्पताल में रहकर कभी नहीं कर सकती । मैं अपने बाबा ( पिता ) को दिया वचन मरणोपरांत ही सही लेकिन जरूर पूरी करूंगी । इसके लिए मेरा डेट पर जाना बहुत जरूरी है और तुम देखना ! मैं इस झूठ को कल के बाद रहने ही नहीं दूंगी । हमें आगे झूठ बोलने की नौबत ही नहीं आएंगी । मैं कल कुछ ऐसा करने वाली हूॅं जिससे उसको इस शादी से इंकार करना ही पड़ेगा ।' अरण्या ने शिविका की तरफ देखते हुए कहा ।
' यह हुई ना मेरे बेस्ट फ्रेंड वाली बात ।' कहते हुए शिविका ने अरण्या की तरफ हाथ बढ़ाया जिसे अरण्या ने थाम लिया ।
क्रमशः
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

0 टिप्पणियाँ