आए दिन देखती हूं एक सपना।
मन ही मन है रोज का जपना।
स्वर्ग सा सुंदर हो अपना भारत।
दुनिया इसकी करे इबादत।
संतुलित हो इसकी आबादी।
नम्रता,सदाचार के सब हो आदी।
इज्जत के लुटेरे ना कोई दानव हो।
सभी सज्जन,ईमानदार मानव हो।
क्या पूरा होगा मेरा ख्वाब?
रश्मिरथी सभी अधिकार सुरक्षित 2018-2022
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