वतन है मुझको प्यारा,
देश है मुझको प्यारा,
जान निसार करते हैं हम,
मैं सैनिक हूँ देश का,
किसी के आगे हम,
शीष झुकाते नहीं अपना,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूं देश का,
घर परिवार से पहले,
है देश हमको बड़ा प्यारा,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूँ देश का,
मैं हूँ देश का पहरेदार,
ये देश है पूरा,मेरा परिवार,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूँ देश का,
भारत का वीर सिपाही हूँ,
पीछे हटना न सीखा हमने,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूंँ देश का,
ठंडी गर्मी और बारिश,
कभी न डगमगाए कदम हमारे,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूँ देश का,
लाल हैं हम भारत माँ के,
खड़े रहते हरदम सीना तान,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूँ देश का
तिरंगा झंडा शान हमारी,
मुश्किल से मिली हमको आज़ादी,
वतन है हमको प्यारा,
मैं सैनिक हूँ देश का,
भारत माँ को शीष नवाते,
वंदन करते हम, स्वदेश प्रेम हमारा,
वतन है मुझको प्यारा,
मैं सैनिक हूं देश का...।
काव्य रचना -रजनी कटारे
जबलपुर ( म.प्र.)

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