आज देश देश
हर कोई शहीदों के शहीद गीत गा है 

खुशियों की बात है हम खुश हैं 
तिरंगा फहराकर खुश रहें 

गुलामी की बेड़िया कट गई हम आजाद हैं 
क्या आपने कभी सोचा हम सच में आजाद हैं 

नही, हम आज भी खोखले आदर्शो और रूढ़ियों के गुलाम हैं
देश के वीरो का संघर्ष और बलिदान सब व्यर्थ हो गया

अपने लहूं से सींचकर जो आजादी का प्रकाश लाये थे 
वक्त के साथ धूमिल हो कही खो गया 

रोज होते महिलाओं पर कितने अत्याचार
फैला चारों ओर कितना भ्रष्टाचार 

अन्धविश्वास की जड़ों ने बांधा कसकर 
बेटा ,बेटी के चक्कर में रह गए फसकर

जिस देश में बेटियों को दहेज के लिए जला दिया जाता है
वो देश भला कैसे आजाद हो सकता है

चन्द रुपयों के लिए भाई ,भाई का खून बहा दे
झूठी शान के लिए बेटी को गर्भ में मरवा दे 

फ़र्क इतना सा है तब अंग्रेजो के गुलाम थे 
अब अपनी वहसी सोच के गुलाम बन बैठे

सुनो भारत वासी आजादी का जश्न मनाने वालों
पहले अपने दिलों में प्रेम की ज्योत जला लों

वीर धरा के वीरो , भाई चारा और सदभाव जगाओ
 फिर मिलजुल कर आजादी का त्यौहार मनाओ ।।

नेहा धामा " विजेता "
बागपत , उत्तर प्रदेश
स्वरचित एवं मौलिक ,