उमा महेश के तुम सुत
मात पिता हेतु प्रस्तुत 
करे जग तुम्हारा वंदन 
लीला तुम्हारी है अद्भुत

एकदंत सोहे छवि तुम्हारी 
रवि समान दिवि तुम्हारी 
बुद्धि विवेक के प्रदाता 
गाते गीत कवि तुम्हारी 

मोदक में है जान बसती 
मूषक संग करे हैं मस्ती 
हो शुभ कार्य में प्रथम अर्चन 
तुमसे है जग की हस्ती 

लम्बोदर तुम कहलाते
अष्टसिद्धि के तुम प्रणेता
रिद्धि सिद्धि का दे वरदान 
विघ्न हरो हे विघ्नहर्ता 

हे गजवदन,पार्वतीनंदन 
करते हम स्नेह वंदन 
करे पूजा प्रथम तुम्हारी 
करो स्वीकार अभिनंदन 
आरती झा(स्वरचित व मौलिक)
दिल्ली 
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