आओ तिरंगा फहराते हैं... 
स्वतंत्रता का पर्व मनाते है...
साल में एकबार हमने झंडोत्तोलन कर लिया
अपनी आजादी के संघर्षों को याद कर लिया
दे दी भाव भिनी श्रद्धांजलि शहीदों को...
संजो लिया स्वतंत्रता सेनानियों की यादों  को...

पर नभ में फहराते इस तिरंगे के नीचे...
क्या वास्तव में हम आजाद है ये सोचें...
हमारा तिरंगा है हमारी आजादी का प्रतीक
परतंत्रता से स्वतंत्र होने की सीख...

पर हम अपने बंधनों से अपने विचारों से...
क्या आजाद हो पाएं हैं जीवन के प्रकारों से।
सोचें हमने जिस देश के लिए...                                      
लड़ी लड़ाइयां जिस परिवेश के लिए...

क्या वास्तव में ये वही लोकतंत्र भारत है...?
क्या वास्तव में इसे ही कहते स्वतंत्र भारत है...?

नहीं.....!!!

हम अब भी नहीं स्वतंत्र... 
सामाजिक ऊंच नीच के भाव से...
भारत में पलता जो अत्यंत चाव से।
संपन्न और संपन्न हुए जा रहें है...
विपन्नता का दंश दबे कुचले पा रहे हैं।

हम सब अब भी दास बने हैं जाती- पाती के...
जो दिन ब दिन हमें और जकड़ती जाती है।
कहीं कोई धर्म को ठेकेदार बना बैठा है...
तो कहीं भाषाई आधार पर कोई ऐंठा है।

छोटी छोटी बातों पे यहां हम भड़क जाते हैं...
न जाने कौन सा दासत्व भाव ले अपनों का खून बहाते उन्हें तड़पाते हैं
सोचने समझने की क्षमता को हमने गिरवी रख दिया...
और एक स्वतंत्र जीवन जीने का दंभ भर लिया।

स्वतंत्रता बेटियों की भी... 
छीन कर कहते है... 
#आजाद #भारत में हम रहते हैं।
ये स्वतंत्रता की गढ़ी हमने...
कैसी परिभाषा है।
जब एक वर्ग" के मन में... 
अभी भी स्वतंत्र होने की आशा है।

माना ये तिरंगा हमारा... 
विश्वपटल पे आजादी का द्योतक है...
अनेक बलिदानों की गाथा का ये एकमात्र लेखक है।
परन्तु सही मायनों में आजादी कहां सम्पूर्ण है...
विश्व पटल पे छाप छोड़ने में हमारा तिरंगा अब भी कुछ अपूर्ण है ।

बेटी हो या कोई गरीब...
या हो कोई दलित या बदनसीब...
सब के प्रति रहे समानता का विचार 
सभी को मिले उसका मौलिक अधिकार

सही अर्थ में #आजाद #भारत का वो सपना
तब ही पूरा हो पाएगा अपना
हर व्यक्ति गौरवान्वित हो विश्वास से...
प्रत्येक दिन मनाएगा जश्ने आजादी हर्षोल्लास से।

जय भारत 🙏
         स्वरचित व मौलिक --
                           कीर्ति रश्मि " नन्द
                       ( वाराणसी)- 14/08/21